कमी है (प्रेम की कविता)


 कमी है (प्रेम की कविता)

बात तो कर लेता हूँ मैं।
और मन भी लग जाता है।
पंसद भी आने लगती है।
और दिल भी धङकने लगता है।।

पर जब बात करने का मन करता है।
या जब देखने को जी चाहता है।
या जब कुछ बताने का मन होता है।
या कुछ सुनने का मन होता है।
वो जो भाव खाती है।
सुनती नहीं और जल्दी चिढ़ जाती है।
किसी का फोन आये मुझे भूल जाती है।
तब लगता है, कमी है।।

अभी उसमें मेरी चाहत की कदर की।
उस दिल में बसनें वाली की।
उस हसीन चेहरे की।
उस साफ दिल दोस्त की।
मेरे विश्वास पर खरा उतरे उस लङकी की।
मेरे जीवन साथी की।
अभी कमी है।।

वो मुझसे दुर है।
ये मासुम और बात करने वाली है।
पर ये वो नहीं , जिसकी मुझे तलाश है।
मुझे उसी की तलाश है।।

- कवितारानी।


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