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अपनी गाथा | Apni gatha

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  अपनी गाथा  धरती पर आये कई साल हो गये । किसी संघर्ष की अब बात नहीं । अपने काम के अलावा कोई बात नहीं । कई बरस बिताये थे दबिस में कहीं । नये चुनाव से फिर उड़ान भरी ।  परीक्षाऐं दे मास्टर बने । छोड़ मास्टरी फिर नयी राह चुनी । ताना था जमाने का की कृपा हुई । नई परीक्षा दी और पास भी हुई । पश्चिम से दौङ पूरब को आया । निचले पद पर जाकर अब ऊपर को आया । सफर जिंदगी का जोरदार रहा । पढाई के साथ काम भी किया । कोई कम नहीं कोई कोशिश बेहतरीन की की  । जिसमें नहीं हुआ पास पर मेहनत ओर की । सुबह से शाम और अपनी धुन में जाते हैं  । शादीशुदा जिंदगी में गर्म रोटी खाते है  । मकान खुद का - कर्ज खुद का उठाते हैं । बचत खुद की चल रही है । साथ भागदौड़, समाज और मौज चल रही है । अब सपने शिखर के अब कभी-कभी आते है । सोच रहे मौका मिले तो लेखनी को आजमाते है  । पर अभी अपनी गाथा बनाते है  । अपनी गाथा सुनाते है । Kavitarani1  204