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बुरा में नहीं | Bura main nahi

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  Click here to see video बुरा मैं नहीं बुरा मैं नहीं, बुरा वक्त बन आया है। लगता है कहीं अंधेरे कोनो से निकल आया है। जैसे दुख का साया मंडराया है। मै खुशी की तलाश में था आगे बढ़ा। ये मेरे सिर पर था जैसे खङा। जब मै अपनी जिद् पर ही अङा। वक्त ने बताया कि वो मुझसे है बङा।। मैं हकलाया, भरमाया, शर्माया, लजाया। फिर उस समय कुछ ना समझ पाया। बचा फिरा फिर संभाल लाज। निकाला वक्त फिर कुछ बङा आज। आज फिर खुशी की तलाश में हूँ।  पर जैसे मन में कहीं उदास मैं हूँ। अब एक हिचक जैसे साथ है। लगता है निराशा कुछ ज्यादा खास है। मैं फिर सोंच विचार कर रहा। देख रहा, जाॅच रहा कि कौन ज्यादा खराब है। पता चला देख पिछे कि; बुरा मै नहीं, बुरा वक्त बन आया है।। - कविता रानी।

कर्म पथ पर | Karm path par

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  अपने कर्म पर ध्यान केन्द्रित कर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने के अतुलनीय अनुभव को सांझा करती एक सुन्दर कविता। इसमें आपको प्रेरणात्मक शब्दों का संतुलित संग्रह मिलेगा। Click here to see video कर्म पथ पर अग्नि पथ पर बङ-बङ, बाधाओं से लङ-लङ, मैं पथिक सिखता जाता हूँ,  नित कर्म पथ पर बढ़ता जाता हूँ।  हर्ष उल्लास को समेट, दुख-दर्द को सहेज, मैं अक्सर नई सिख पाता हूँ,  नित कर्म पथ पर बढ़ता जाता हूँ।  कुछ रोङे आ जाते हैं,  कुछ लोग राह भटकाते हैं,  मैं उन्हें लिखता जाता हूँ,  नित कर्म पथ पर बढ़ता जाता हूँ।  जो मिलकर बन जाते खास, जो सहयोग करते रहकर पास, मैं उन्हें मन मंदिर में बसाता हूँ,  नित कर्म पथ पर बढ़ता जाता हूँ।  कुछ कपटी भी भीड़ जाते हैं,  कुछ दुष्ट अनायास दुख दे जाते हैं,  मैं उन्हें भूलता जाता हूँ,  नित कर्म पथ पर बढ़ता जाता हूँ। । -कविता रानी।