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अब / Ab

  अब  महिने बीत गये हैं, परायी सी लगती अब। देखने को जी होता भी, पर मन को चिढ़ती अब। चेहरे पर वो नूर नहीं, खोयी सी अपने में तू। आँखों में सूरमां भी, पर भाती नहीं अब। माथे पर बिंदिया है, गले में मंगलसुत्र अब। मेरी कहूँ कैसे तुझसे, अहसास ही नहीं होता अब। स्पर्श अब औझल है, प्रेम रस खोया सब। मधुर बातें दबे पन्ने सी, भूले बिसरे लम्हें अब। याद तू आती नहीं, पलकों से जाती नहीं। देखना अब भाता नहीं, देखे बिना रह पाता नहीं। तुझसे जुङे लोग टकराते हैं, मिलने को उन्हें पैर डगमगाते हैं। किसी पर अब यकिन नहीं, तेरी कोई उम्मीद नहीं। पल-पल एक साये सा, रहता है यादों का पहरा। रख खुद को व्यस्त मैं, जी रहा हूँ अब मैं।। कल के कुछ किस्से हैं, दर्द के मेरे हिस्से हैं। रोती मनाती तू आयी भी, सिसकी भर इतराई भी। वही तरिका था लङने का, वही सलिका था लङने का। फिर मैंने बात ना की, अब तेरी यादों की बात ना थी। परायों सा तेरा जिक्र है, अकेले दूर तेरी फिक्र है। पागलों सी तू होना ना, गैरों सा मैं होना ना। आशाओं के द्वीप पर, मैं बैठा अपनी रित पर। मुझमें कमियाँ कई पनपी सी, तुझमें कमियाँ कई दिखती सी। अब कोई बात नहीं, ते...

अब / Ab / Now

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Ab - click here to see video अब अगर लिखी है तन्हाई, तो बता दे मुझे,  यूँ दर-दर भटक कर थक गया हूँ मैं  । बहुत पुछते है लोग मेरी पसंद के बारे में,  सबको समझा समझा कर थक गया हूँ मैं  । लोग देखते है मुझे और मेरी हालत को, सबको बताऊँ ऐसे दर्द छुपा चुका हूँ मैं  । बताने को नहीं ज्यादा कुछ मेरे पास, बस जो है बोझ उठा रहा हूँ  मैं ।  अगर करम मेरे ये हि है तो बता दे, सपने देखना छोड़ दूँ मैं  । नहीं हैं खुशियाँ मेरे हिस्से में तो, दुख में जीना सिख लूं मैं  । लोग तंज कसते है, मेरी उम्र भी, सबको बतानें जैसे हालतों मैं नहीं हूँ मैं । आजाद हूँ भले आज मैं,  पर मन से कैसे जी रहा हूँ मैं  । अगर यही है मेरी किस्मत में,  तो दे दे यही हक से जीने कि हिम्मत मुझे । दब कर रहने लगा हूँ मैं, कोई कर्ज बाकि रहा नहीं है ।। Kavitarani1  145