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जिन्दगी तुझसे खफा नहीं | Zindagi

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जिन्दगी   खफा नहीं तुझसे ऐ जिन्दगी मैं। तू है तो हूँ मैं।  ख़फा नहीं तुझसे तुझसे ऐ जिन्दगी मैं।  तू है तो हूँ मैं।  बस शिकायत है तुझसे ये। जो चाहा कभी वो मिला नहीं हैं। । ख्वाब सारे समेट बचपन जीया। आज फिर याद कर रहा क्या जहर था पिया। याद नहीं कुछ खास ऐ जिन्दगी।  पर पास नहीं कोई बंदगी। बस शिकायत है तुझसे ये। जो चाहा कभी वो मिला नहीं। । क्या पास था मेरे सोंच रहा हूँ मैं।  क्या पास रह गया सोंच रहा हूँ मैं।  जो था वो पसंद नहीं आया कभी। जो है वो सपनों सा लगता ना कभी। बस शिकायत है तुझसे ऐ जिन्दगी।  जो चाहा कभी मिला नहीं। । खफा नहीं तुझसे मैं ऐ जिन्दगी।  जो है वो कहीं से कम नहीं।  पर सपने दिये जो अनगिनत सब ही। कोसते हैं मन में पङे कहीं।  बस यही शिकायत है तुझसे जिन्दगी।  जो चाहा कभी वो मिला नहीं। । -कवितारानी। 

जिन्दगीं / zindagi

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  सबके जीवन में कई बाधाऐं होती है, कई सारे उन बाधाओं से लड़ते हैं, और कई सारे हिम्मत हार जाते हैं। यह कविता ऐसे ही कठिन जीवन पर है जिसमें बाधाओं पर जीत हासिल करने की जद्दोजहत बताई गई है। जिन्दगी सफ़र मेरा आसान  न था, ना आसान जिन्दगी जिया मैं कभी। अपनी परेशानियों से  आगे बडा में।  लड़ रहा चुनौतियों से अभी। पता है मुझे अंतिम लश्य यहाँ नहीं।  पर दुनिया छोड़ अभी जाना नहीं।  कहाँ  तक पहुँचा हूँ नहीं पता, बस रूका हुआ सा लग रहा हूँ अभी। आसान ना था पहला पड़ाव पाना, अभी बाकी हैं बढ़ाव सामने कई । कौन जाने कहाँ तक जायेगी। जिंदगी मेरी कब खुलकर मुस्कुरायेगी। अभी बस गीन रहे दिन  यूँ ही,  जिंदगी आसान है ,पर है रूकी हुई। सफर मेरा आसान था भी नहीं,  ना आसान जिन्दगीं जिया मैं कभी। । - कविता रानी।