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बेपरवाह है | Bepravah hai

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बेपरवाह  हो बड़ी बेपरवाह तुम । कहती हो क्या । सब समझ आता है मुझे । कुछ कहता नहीं तो क्या । क्या-क्या ना कह पास लाता तुझे । हाँ, ये मेरी कमजोरी है । मिलती नहीं हमजोली है । मिल जाती टोली पर, हटके मिले वो चाहिये मुझे । तुझे परवाह नहीं,  और मुझे इसका गम नहीं । हूँ अकेला, छेला, अपनी जीवन बेला में, मैं रेला, जानता हूँ कब क्या करना है । वश नहीं मन पे, यही एक झमेला है । पर तु जो हो पास, कहती हो अपनी बात, बात में प्यार तो नजर ना आता, आता है प्यार साथ लम्हों पे, और तेरी बेपरवाह जिन्दगी पे । यही तो कुछ खास है, तु बेमिसाल है, पर तू बड़ी बेपरवाह है,  तू लापरवाह है ।। Kavitarani1 259