ऐ जिन्दगी / E zindagi
Click here to see video कवि मन यहाँ अपने जीवन को सजीव अन्य जन मान सम्बोधित करते हुए कह रहा है । अपनी बातों में वो जीवन से निवेदन कर रहा है। ऐ जिन्दगी ऐ जिन्दगी ! तू हॅसकर गुजर, गुजारिश है ये । आरजू है ये की तू खुश रहा कर । जहाँ मे आस कर रहा, कर काम कर । दुखों की सोचना कम कर । खुशी की बात कर । ऐ जिन्दगी ! तू यादगार बन । कोई लिखे जब तेरे बारे में । जीना चाहे तुझे । जब कोई सुने तुझे ही । मेरी बात पर गौर कर । ऐ जिन्दगी तू मजेदार बन । जीना है तो जी । हर किसी के लिये ना मर । जो मिल रहा उसमें संतोष कर । जो नही मिल रहा, उसकी परवाह ना कर । ऐ जिन्दगी तू अपनी बात कर । जैसे भी दिन हो । हॅसकर चल ।। Kavitarani1 211