मकर संक्रान्ति पर
मकर संक्राति पर - विडिओ देखे मकर संक्रान्ति पर उड़ रही पतंगे सब ओर । संगीत का शौर है हर छत पर । झूम रहे लोग हर ओर । खुश लग रहे सब मकर संक्रान्ति पर ।। मैं बैठ दूर अपने गाँव से । देख रहा पतंगे अपनी छत से । गुन रहा संगीत एक धुन से । याद कर रहा बचपन गाँव मन से ।। काश मैं भी पतंग बन जाऊँ । ऊडूँ मस्त हवा में और गोते खाऊँ । डोर कोई काटे ना इतना साहस कमाऊँ । जो झेड़े मुझे उसकी पंतग काट गिराऊँ ।। शौर करूँ अपनी मस्ती में । झूमूँ अपनी जीत की खुशी में । डील दूँ अपनी पतंग को खुले आसमां में । आजाद फिरूँ में ऊँचाईयों में ।। धूप का डर ना ठण्डी हवाओं का । दुपहर की परवाह ना सांझ की । तिल , मोतीचूर के लड्डू खाते हैं । मस्ती से छत पर पतंग उड़ते और खैलते है । मकर संक्रांति पर ।। Kavitarani1 93