जैसे तुम वैसे मैं / Jaise tum vaise main
Click here to see video जैसे तुम वैसे मैं सच्चा था मैं, सच कहता था । अपनी जुबान पर अड़ा रहता था । पर तुम थे समझदार, धार से करते रहते वार । कहते कुछ - कुछ थे करते । मेरी अच्छाई पर थे लड़ते । करता क्या ! क्या-क्या में सहता । ठोकर खाकर संभला अब - अब तरसा करता । रहता जैसे तुम - वैसे मैं । अड़ता मैं जैसे तुम वैसे मैं । मान जाता हूँ रूक जाता हूँ, सुनता हूँ । चालबाजियों से चाल बचाता हूँ । मन मारता और भाव खाता हूँ । अच्छा बना रहता हूँ पर अब अच्छाई नहीं । दिन आये खुद पर ऐसी कोई नहीं । बस अब ज्यादा ना सुनता । बात पसंद आये बस उतनी करता । हरता मन की पीड़ा - क्रीड़ा करता । अब जैसे मिलते तुम वैसे मैं । अब जैसे, तुम वैसे मैं । Kavitarani1 175