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मोह के मारे | moh ke mare

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Click here to see video मोह के मारे। चित् चिंतन छोङ; अभागा! मति मार, मोह को भागा। कौन काल, विजय पताका? उलझा देह, मन बोझ आका।। बना दानव का राज भारी। देव लोक तक विजय सारी। पर लोभ भरा सोम रस भारी। फिर पीढ़ीयों तक पराजय सारी।। था मंथन मन का सारा। मंथन किया खीर सागर सारा। भाग्य साथ, अमृत हाथ सारा। मोह तन का, फिर दानव हारा।। -कविता रानी। 

सहारा | Sahara

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Click here to see video सहारा। नोकायें लहरों पर सवार कर, बहती धारा को पार कर, भूल ना जाना राही के; था नाविक कौन? था पुल कौन? वो जो दुर्दिन में काम आते है।  वो जो तेज धार पर चढ़ जाते है।  वो सहज ना सबको मिल पाते है।  वो देव दूत कहलाते है।  तुम अपना मार्ग सुगम कर, बहते दरिया को पार कर, भूल ना जाना राही के; था सहारा कौन ? था मुश्किल में साथ कौन ? जीवन सफर में हमें कई तरह के लोग मिलते हैं, इनमें से कुछ हमारे जीवन को ऊर्जा देने का काम करते है और हमें मुश्किल समय से उभारनें का काम करते हैं । यह कविता हमारे जीवन के उन्हीं सहारा देने वाले लोगों के ऊपर हैं । - कविता रानी। 

लोकतंत्र | Loktantra

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Click here to see video   लोकतंत्र; एक परिचय कल्पनाओं को पंख देते हैं,  सब मिलकर अंक देते हैं,  यही बहुमत है, यही विजय है, यही जनतंत्र है, यही लोकतंत्र है। भाषा कई;  परिभाषा कई, जन-जन का चुनाव यही। एक मत से सरकार बदल देते हैं। बरसों से जमे जमाये तख्त बदल देते हैं।  जब जनता चाहे अपने चहेते को विजय कराना, तो लहरों के साथ परिणाम बदल देते हैं।  यही जनतंत्र है।  यही लोकतंत्र है।  समय बदलता,  परिस्थिति बदलती, विजय काल में जो बदला, जनता चुनाव में उसे बदलती। जो जनसेवक बना रहता, जो जन जन का मानस समझता, जो हर समय एक सा रहता, जो बेसहारो का सहारा रहता, जनता फिर उसे समझती। वही विजेता बनता, वही नेता बनता, वही जनतंत्र का रक्षक बनता। यही जनतंत्र है। यही लोकतंत्र है।  आओ मिलकर साथ आए। मतदान करे; सच्चे सेवक को जीतायें। देश सेवा को सर्वोपरि रखें।  मानव सेवा को साथ रखें।  हाँ त्याग रखें,  स्वार्थ त्यागें।  लोकतंत्र को मजबूत रखें।  आओ मिलकर साथ चलें।  लोकतंत्र को मजबूत करें।  जनता का शासन है, जनता को दे। जनता के लिए शासन है...

धर्म धरा | Dharm dhara

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Click here to see video Dharm dhara इस माटी का कण-कण देव है, इस धरा की धङकन धर्म।  न्योछावर हुए कई दूत है, समर्पित है मेरा भी मन। आभार मेरे इश्वर को, जिन्होंने दिया यहाॅ जन्म। धन्य धर्म धरा भारती, धन्य यहाॅ का जीवन। । करबद्ध करुँ आरती, नित व्रत-उपवास।  कर्म करूँ सनातनी, नित आधुनिकता का उपहास। जुड़े जङ से मां भारती, है सब तेरा उपकार। धन्य धर्म धरा भारती,  धन्य यहाँ का जीवन; है आभास। देवभूमि है अतुलित, है अतुलनीय यहाँ का इतिहास।  अद्भुत यहाॅ की संस्कृति,  अनमोल इसके प्रमाण।  नमन यहाॅ के वीरों को, बारंबार प्रणाम।  धन्य धर्म धरा भारती,  धन्य यहाॅ का जीवन। ।  -रानी मीना। 

जीवन सफर | Jivan safar

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Click here to see video जीवन सफर | jivan safar जीवन सफर में कई सुहावने दृश्य, कई मनमोहक राहें हैं। पर पथ पर कभी पत्थर, कभी ढलानें हैं। चलना थोड़ा संभल कर ऐ राही। जीवन इतना आसान भी नहीं है।  -कविता रानी।