वही गर्मी है | Vahi garmi hai
वही गर्मी है फर्श मार्बल का है, मजबुत मकान है । पंखे नये है, हवायें दे रहे है । अभी आराम महसुस कर ही रहा था । अभी बचपन को भूल ही रहा था । कि मौसम हुआ महरबान । लगने लगी उमस, बङी गर्मी । और याद आ गया वो जहान । वही गर्मी, वही मकान । वो खेलू की छत, वो मिट्टी की दीवारें, वो सीमेंट का उखड़ा फर्श । वो चार पाई, वो असंग की सुगंध । वो लू के थपेड़े, वो जुगाड़ी पंखे की हवा । वो मेरा आराम करना । बिना शिकायत पढ़ते रहना । ठीक वैसे - जैसे पढ़ रहा अभी । वही गर्मी है । ये वैसे ही गर्मी है । Kavitarani1 290