अब मन नहीं करता / Ab man nahi lagta
अब मन नहीं करता अब मन नहीं करता। कि तु ही हो पास। अब मन नहीं करता। कि सपने हो साज। अब साजन सी तु है नहीं। अब पिया के मन की तु नहीं। अब है नहीं शिकायतें कोई। अब तेरे बातें बेमतलब है। अब तुझसे मेरा मन नहीं।। आँखो में भर दोखा। बातों में भरलो चोखा। चाहे कर लो मिठ्ठी बात। आँखों को सजा लो आज। चाहे कर लो 16 सिंगार। हो चाहे तारो की भात। पर अब वो सब भुला ना जायेगा। तुझ पर अब मन नहीं आयेगा। अब बाहों में भरने का मन नहीं करता। अब जन्नतें भी जान्नुम हैं। अब तुझ बिन जिन्दगी है। तेरी सारी बातें बेमतलब अब। अब कुछ मन नहीं करता। अब मन नहीं करता। अब मन नहीं करता।। -कवितारानी।