डर भी है / darr bhi hai
डर भी है परिवर्तन की लहर में डर भी है। हवा, पानी, जीवन की बदल में डर भी है। कैसे होंगे दिन अकेले एकान्त के। धोरों वाली मिट्टी में होंगे कैसे खैल वे। कब जाके सुकून मिलेगा मेरे लहजे को। प्यास अधुरी कब मिटेगी, कब जाके शांत होगा चित्त मेरा ये। परिवर्तन की लहर में डर भी है। बदलने को जमीन मन निडर भी है। जाने को जहान तैय्यार हूँ मैं। अपने हिसाब से जीने को तैय्यार हूँ मैं। तैय्यार हूँ कि अब अकेले हाथ मजबुत है। करना है बहुत कुछ उससे तैय्यार हूँ। परिवर्तन की लहर में डर भी है। आगे जाने से पहले म मैं डर भी है। किसी का साथ पाने को डर भी है। किसी का साथ ना मिलने से डर भी है। परिवर्तन की लहर में डर भी है।। -कवितारानी।