ख्वाब सच होते तो / Khavab sach hote to
ख्वाब सच होते तो देखा जो ख्वाब था हकीकत बन जाता। बनती दुनिया हसीन और भविष्य निखर जाता। तब गाता तेरे गुणगान बस भक्त महान बन जाता। बाँटता खुशियाँ लाखो और करोङो को हॅसाता। देखा था जो ख्वाब अगर सामने आता। बरस बीते-बीते लम्हे हजार। हर उतार-चढ़ाव ने निचोढ़ लिए मेरे हर ख्वाब। बिखरे टुकङे टुटे काँच सा बिखर रहा है ख्वाब। मन अब भी दोहराता है वही पिछङी बात। देखा जो ख्वाब था हकीकत बन जाता। तो ना होती जिन्दगी से रुसवाई ना तेरी निन्दा करवाता। रोज सोता और रोज तेरी पुजा करवाता। किस्से जो देखे महलों सा सजाता। आराम होता, मौज होता, होता आनन्द-उल्लास। देखता रहता राह नहीं पैर ना एक जगह जमाता। राह नई, मंजिल नई इस दुनिया को दिखलाता। ख्वाब जो हकीकत होता तो क्या-क्या ना होता। जो ख्वाब सच होता तो क्या ना होता।। -कवितारानी।