भारत की नारी / Bharat ki nari
भारत की नारी अक्सर किस्से कहानियों में सुनाते सब हैरानी। कभी सिस काटती हाङी कभी मर्दानी झाँसी वाली रानी। कितने किस्से कहानियों की बात कहूँ याद है मुझे वो जुबानी। हकीकत मन से बयां, कैसी है भारत की रानी। आँचल में दुध आँखों में पानी, कौमल है भारत की नारी।। बखान जग में हिम्मत का कोई नहीं शामी। थर-थर कांपे शैतान रुप बने जब काली। हथियार हाथ महान होती वो शक्ति कल्याणी। अपने दम पर सार करे संभाल करे भारत की नारी। आँचल में दुध आँखों में पानी गजब है नारी तेरी कहानी।। दो घर अनन्त हाथ, मुख तुझे ताकते। बिन बोले परोक्ष, प्रत्यक्ष तुझे निहारते। आधार घर की बुनियाद, मजबुत करती तुम। अर्थ, धर्म, समन्वय सब का करती तुम। देख शक्ति अतुलित अचंभा होता होती हैरानी। आँचल मैं दुध आँखों में पानी भारत की तुम नारी।। कोमलता, सजागता, सहन सीमा की सार हो। मधुरता, सुंदरता, रस की खान हो। देव, दानव सब की विजेता हो। तेरे दंभ की सुनी मैंने भी कई कहानी। आँचल में दुध आँखों में पानी भारत की तुम नारी।। -कवितारानी।