मेरी मां / Meri Maa
मेरी मां तुम ना हो जो साथ तो डर लगता है माँ, तुम ना हो जो पास तो घबराता है जीया माँ, ओ माँ... दिन तो जैसे-तैसे कटते डराती है रातें माँ। होती सुबह-सुबह जब नजर तुमको ही ढूँढे , ओ माँ... लगता है डर आ ना जाये शराबी पापा यहाँ। कांपता दिल जब सुनता कहर बरपा जो रहा। ढुँढती नजरे तुम्हें जब गम का होता आसरा पास यहाँ। चोहूँ रोना गोद में तुम्हारे जब रुकता ये काफिला, मेरी माँ... तुम ना हो जो पास तो जाऊँ किसके यहाँ। तुम ना हो जो साथ तो हाथ ना किसी का मिला माँ, ओ माँ... भाई दिया था तुने कि साथ मेरा होगा। दुख दर्द मैं वो सांत्वना देगा, पर कैसी थी किस्मत पाई। मेरी नहीं थी गलती फिर भी उसने लताङ लगाई थी। साथ होना था जिसे वो दूर तमाशबीन बनता गया। बची थी जो बाप के द्वारा थी कसर भाई पुरी करता गया माँ। ओ माँ... माँ... तुम ना हो जो साथ ये समाज ना अपना रहा। बेचारा, लाचार और मजबुर को करता गया, मां... ओ माँ... तुम ना हो जो साथ तो डर लगता है माँ... तुम ना हो जो पास घबराता जीया। ओ माँ, मेरी माँ... ओ माँ।। -कवितारानी।