सफर साथ / safar sath
सफर साथ आशाओं का थाम दामन चलते रहना है। कोई दे साथ या ना दे बढ़ते रहना है।। एक मुकाम पर आकर ठहरा सा हूँ मैं। एक रब भरोसे जी रहा हूँ मैं।। दोस्तों से खुलकर विमर्श किया बात कही। खुलकर अपनी ही अपने आप ने खिल्ली की।। घर-परिवार वालों के बङे बोल-बोल रहे नाम के। दो पैसे सहायता मांगी तोल पङे घोल-घोल के।। अपना मान अपना दर्द बताते रहते थे। अपनों ने मान ना रखा और पीठ पिछे से सताते हैं।। कैसे बंधंन जग रे तेरे अपना शब्द बस नाम का । नाम होने पर भी जग जपता भजन पैसों के नाम का।। एक विनती और प्रबल बनके मांग रहा हूँ आज। इतना बङा औहदा देने पैसे देना याद दिलाऊ तन इन सबका आज।। बदला नहीं, बदली इनकी फितरत बता दूँगा एक दिन। चल रही जिन्दगी चली तो मुकाम वो पा लुंगा एक दिन।। अभी हिम्मत जुटा-जुटा के काम को करना है। जब तक कर सकू नेक काम वो कर सकू।। थकना नहीं, रुकना नहीं, नहीं चुप रहना है। इस जीवन का आधार दर्द तो कैसे भी हो सहना है।। एक-एक कर सबके चेहरे सामने आते रहते हैं। भोले मन हम जाने क्यूँ घबराते हैं।। एक रास्ता, एक सफर, मंजिल एक शिखर मेरा। जो सिख रहा जीवन भर वो अनुभव ही फिक्र मेरा है।। -कवितारानी।