अब तो / Ab to
अब तो अब कोई शिकायतें नहीं, अब कोई रुठना नहीं। अब कोई बहाना नहीं, अब कोई रुसना नहीं। अब तो जाने देते हैं, कहते नहीं बस जीते जाते हैं। अब तो बस सुनते हैं, अब तो बस सहते हैं।। समय गुजर जाता है, घङी देखे बिना। रात हो जाती है सुरज देखे बिना। बंद कमरों से बस आवाजे आती है। अब तो मकान के अंदर जिंदगी जी जाती है।। किसी से कहना अब आसान नहीं रहा। कुछ बताना किसी को गँवारा नहीं रहा। सब मन तक ही रखना उचित लगता है। अब तो अकेले रहना ही सबसे सही लगता है।। मतलब तक ही तो अब बात होती है। स्वार्थ के बिना कोई याद नहीं होती है। लोगों की भीङ चुभन करती है। जिन्दगी अब बस मन में हँसती है।। -कवितारानी।