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दुश्मन ये भी हैं | dushman ye bhi hai

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दुश्मन ये भी- वीडियो देखे   दुश्मन ये भी हैं  सरहदों पर देखे हैं।  गोलियों के वार देखे हैं।  जो है दुश्मन वो साफ नजर आते।  जो नजर ना आये साफ। ऐसे दुश्मन अन्दर से खाते है । दुश्मन ये भी है, दुश्मन ये भी ।। बात हुई कई बार घर के भेदियों की।  जेलों में बंद होते कई कैदियों की।  ये समाज कंटक देश की प्रगति खाते है। मिलता कुछ ना इन्हें पर इतराते है। मुख पर मिठा बोलते ये कितने शातिर है।  पर है दुश्मन ये समझा जाते आखिर। देश के अहित पर खुश होते है।  देश की प्रगति में रुकावट ये होते है । दुश्मन वो सरहदों के भी। दुश्मन कुछ ये भी है।। कहना इनका भी कई बार होता है।  मेरा कहना कुछ और नये दुश्मनों  पर है। दुश्मन वो जो सरकार के धन को खाते है। बातें करते बड़ी- बड़ी और चोरी कर जाते है।  वो जो शिक्षा के मंदिर में होड़ में देश का भविष्य खाते है। वो जो किसी सत्य मार्गी को तड़पाते है। जो कर रहा काम अच्छा उसकी रुकावटें बनते है। आये दिन छोटी-छोटी बातों पर देश पर तंज कसते है। दुश्मन ये भी हैं।। हाँ दुश्मन ये भी हैं ।   शिक्षा के मंदिर पर अखाड़ा बनाये...