दुनियादारी | Duniyadari
Duniyadari - click here to see video दुनिया दारी दुनिया दारी में उलझ कर । अपने काम में मग्न होकर । लगता है जैसे एक जमाना पिछे छोङ आये । जैसे जीवन तो अब जी रहे ।। वो जो कभी खाली समय कोई गाना पुराना सुन लेते । या कोई पुराना लिखा गीत पढ़ लेते । तभी याद आता है कि क्या खोया है और क्या पाया है । तभी समझ आता है कि जीवन कहाँ तक ले आया है ।। वरना इस भाग दौड़ में बस होड़ दिखती । बस आज की ही पड़ी रहती । बस कल तक की ही सुध रहती ।। पर जब कोई मन को खुरेज देता है । या बस बचपन की पुछ लेता है । कि वो सुनने लगता नहीं कि क्या पाया-क्या खोया है । मन भर आता है कि जीवन ने क्या दिया है ।। ऐसे-वैसे करते समय गुजर गया है । आज में उलझ कर भी जीवन कट गये हैं । अब सुकून और सेहत पर ध्यान देते है । अब बस बस समय पर छोड़ देते है ।। Kavitarani1 199