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मैं आज बेहतर जीने की सोंचता हूँ | Main aaj behatar jeene ki sochta hun

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मै आज बेहतर जीने की सोंचता हूँ- वीडियो देखे हमेशा ऊर्जावान रहकर जीवन जीना चाहिए, कल और बुरे दौर की चिन्ता में हमें अपना आज नहीं खोना चाहिए, यहाँ इस कविता में भी कवियित्री हमें आज बेहतर जीने की सलाह दे रही है।  मैं आज बेहतर जीने की सोंचता हूँ  एक मासुम सी सुरत थी, नादानियाँ थी । फिर हम बढ़े हुए वो चेहरा कहीं खो गया  और नादानियाँ भी। अब हम एक सुरत लिये है और परेशानियाँ । कई सारी खुशियाँ और कहीं सारी कमियाँ । ना वो कल रहा ना वो बातें । ना ये आज रहेगा ना आज की बातें । फिर क्यूँ सोंचे इतना और क्यों उलझे रहे वही । क्यों सोंचे है कैसे और दिख रहें कैसे । छोड़ सारी बातों को दूर कर खुद से लड़ना है । अपनी कमियों को दूर कर खूद से लड़ना है । वो कल अंत हो जाये तो भूला उसका । नहीं तो कल एक मुकाम होगा नया । नई सोंच नई उमंगो को लेकर । चलता हूँ होंसलो को खुद ढोकर । अपना एक नया आशियाना मांगा है । ख़ुद से एक नया जमाना मांगा है । अब कल की फिक्र छोड़ दी मैंने । एक कल को सोंच से चलता हूँ मैं । मैं आज बेहतर जीने की सोंचता हूँ । मैं  आज बेहतर जीने की सोंचता हूँ ।। Kavitarani1  26