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लाइफ फाइट | Life fight

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लाइफ फाइट लाइफ की क्या झंड हुई पङी है। पास में रहती लङकी और एटिट्यूड पर अङी है। सोंचता मैं भी की मेरी ही घङी नहीं है। यहाँ नाचति है मोर पंख फैलाकर, भले मोरनी सङी है। वाह! जिन्दगी को क्या-क्या पङी है।। अजीब सी दास्तान गढ़ रहे हैं। छुट्टियाँ लगी है और मकान सङ रहे हैं। मौज की खोज भोज बन पच गई।  लाॅकडाउन में सबकी अच्छे से बिगङ गई।  गई  यादें सारी बचपन की, क्या दिन थे वो कोई ना कचपच थी। यहाँ तो उठ के छत पर आना। भटकना निठ्ठलों सा और चाय पीकर फिर सो जाना। बाहर जाओ तो वही बेकार की बातें। फटे जुराबों सी जुबान वाले। आता जाता कुछ नहीं और ज्ञानचंद है। ध्यान एक पल का नहीं और खुद ही संत हैं। संट है अपनी स्टाइल भी। कहना नहीं और वहाँ रहना नहीं।। अपन तो फिर घूम फिर छत पर आते। सोंचते कहीं कोई मिले बातें। दो दिन की ओर कर ले हरकतें। जाना है फिर फिर वही सपने। अपने तो अपने रहे नहीं। जो कहते नहीं कहीं वो लिखते यहीं। यही से अपना किस्सा शुरू। चलो हो गया सुबह का, अब दिन शुरु।। -कवितारानी।

जिंदगी से जंग जारी है / zindagi se jung jari hai

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जो अपने जीवन में संघर्ष नहीं देखता, उसे मंजिल भले मिल जाये पर उसका असली महत्व वो नहीं समझ सकता। जिसे जीवन में संघर्ष मिले है उसे सहर्ष उन्हें स्वीकार कर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए।  जिंदगी से जंग जारी है सपनों की उडान बड़ी भारी है।  कभी इस डगर की कभी उसकी बारी है।  रुक सकना आता नहीं कहीं एक जगह।  जिंदगी से जद्दो-जहद जारी है।। आसमान सा फैला मन मेरा । हवाओं की सवारी करता रहता । एक ठोर जमीन नहीं जाने क्यों। जिंदगी मुस्कुराती नहीं क्यों।। बातें बहुत सारी आ रही है।  शब्दों पर कलम रूक नहीं पा रही है।  कहना है बहुत कुछ पर। आजमाईशे इच्छाओं से हारी है।। एक छोर मिल नहीं रहा मुझे।  एक बात बैठ नहीं  रही मुझमें। कभी इस बात को बनाना चाहूँ।  कभी दुसरी को बनाना चाहूँ। । बाकि है साल कई ओर मिसाल कई । आजमाता हूँ दिन कई साल कई । फिर रहा हूँ रोज मारा-मारा सा। एक सांसो का लिये चल रहा सहारा सा।। मंजिल मेरी अभी बाकि है।  खुले आसमान से मुलाक़ात बाकि है।  बादलों में अटका पड़ा हूँ मैं।  और जिंदगी से जद्दोजहत जारी है। । कवितारानी 1