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है मोहब्बत तो

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है मोहब्बत तो  कैसी मोहब्बत का आलाप करते। स्थिर चित् ना एक पल धरते। हरते रुप, धुप जग की रोज ही। कैसे अपना एक मन है कहते।। है मोहब्बत तो जलना सिखो। तेज धुप में अपनों की सुनना सिखो। है बंसत तो पतझड़ की याद रखो। है बारिश तो सुखे को ध्यान रखो। दूर बैठ ना ज्ञान बांटो। अपने अस्थिर मन को ना बांटो। है सत्य प्रेम तो मीरा बन जाओ। मिले प्रेमी से तो राधा बन जाओ।  एक ही मन को एक पर रखना सिखो। है मोहब्बत तो जीना सिखो।। - kavitarani1 

वक्त भी बदलेगा / waqt bhi badalega

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ना अच्छा समय हमेशा रहता है, ना बुरा समय हमेशा रहता है। तो यही बात मन में रख हमें हमेशा कर्म करने चाहिए। कि जब कोई ऋतु हमेशा बनी नहीं रहती तो ये वक्त कैसे एक सा बना रहेगा- ये वक्त भी बदलेगा ।   वक्त भी बदलेगा  बादल गरज रहे, बिजलियां चमक रही। मौसम भड़क रहा, बारिश बरस रही।  मैं बिन मौसम बैठा हुँ,  क्यों मैं ऐसे ऐठा हुँ। कही खोया हुआ सा मन मेरा, सोच रहा मैं आगे बढ़ने की। वो भाव मेरे औझल है,  सब और जल ही जल है। ये नहीं की मैैं हारा हूँ,  पर अपनों से बेसहारा हूँ।  मैं रोज नयी दौड़ चूनने वाला हूँ , जीवन में जोड़ नयी बुनने वाला हूँ।  इंतजार में हूँ कब बहुगाँ, बहता निर्मल दरिया बनुगाँ। सब कुछ प्रकृति पर है, मौसम भी बदलते है।  ये वक्त भी बदलेगा, मेरा वक्त भी बदलेगा।। - kavitarani1 

नया दौर

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नया दौर  नये लोग, नयी हवा,नया पानी,नयी कहानी, मैं आया बहुत महीने बाद नयी जगह। ये दौर नया,यहाँ मेरे दौर नया, नयी उमंगे है,नये सपने हैं,  नयी आस संग,नई जगह हूँ।। नया दौर, नया जोर,जोश जगाना है,  जाना है नयी ओर। रूका नहीं कहीं अब तक, सवाल वही,कब रहूँगा यही।  नयी आस,नयी प्यास, अभी ठहरा ही हूँ, चाहूँ कुछ खास।  नयी उमंग है, नयी खानी हैं,  रूका हुआ लग रहा,  अपना सा लग रहा , सपना सा लग रहा, सपना सा लग रहा जो जीया अभी,  हैं सब वही, मैं हूँ वही, बस जोश नया, दौर नया।। - kavitarani1

इस दुनिया में / is duniya mein

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सफर भरे जीवन में हमें कोई मन का व्यक्ति मिल जाये तो, जीवन आसान हो जाता है। यह कविता कवि मन की व्यथा बताती है कि किस प्रकार से कम ही लोग है जो उसे भाये हैं । इस दुनिया में  इस भीड़ भरी दुनिया में,  मुझे कुछ ही लोग समझ आये। उम्र बंधन से दूर,  कुछ वृध्द, कुछ युवा ही भाये हैं । कुछ लोग मिले जो मुझसे थे, इस भ्रम जाल वाली दुनिया में,  मुझे कुछ ही सच्चे मिल पाये । इन्हें सहजने की कोशिश में,  इन्हें खोते हम आये । इस गुजरती दुनिया में,  बस अकेले में खुश रह पाये।। - कविता रानी।

जो बारिश हुई।

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  जो बारिश हुई।  तपती जमीन को सुकून मिला।  गर्म हवा शीतल हुई।  एक तड़प जो जीने की लगी थी, उस जुनून को जान मिली। कब से इंतजार कर रहें थे, इस सुखे का खत्म होने का। जलती धरा अब नम हुई,  कई दिनों बाद जो बारिश हुई। । चहरे खिल गये, रूह को राहत मिली। घबराहट जो बढ रही थी, उसे चाहत अपनी  मिल गई। लगता हैं जैसे मिन्नते पुरी हुई, कई दिनों बाद जो बारिश हुई। । - कविता रानी।

मैंने खुद को सच्चा पाया।

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मैंने खुद को सच्चा पाया।  मेरे सुने लम्हों में,  मैंने खुद को सच्चा पाया।  पुछा तुमने जो, मैंने दिल से बताया। एक बंधन विश्वास का बना, और तुझे संदेह हुआ।  सब जानते हुए भी,  मुझसे तु दुर हुआ।  इस भीड़ भरे जग मे, क्या ना मैंने खोया।  कुछ लम्हों तक ही सही, तेरा साथ मैंने पाया।  यादों की तस्वीरों मे, तु भी इतिहास बन जा। एक बची ढोर पहचान की, अब उसे भी तोड़ जा। मेरे एकांत में,  मैंने फिर खुद को समझाया। इस बदलते जग में,  एक मन का खुद को पाया।  मैंने खुद को सच्चा पाया। । - कविता रानी।    

जिन्दगीं / zindagi

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  सबके जीवन में कई बाधाऐं होती है, कई सारे उन बाधाओं से लड़ते हैं, और कई सारे हिम्मत हार जाते हैं। यह कविता ऐसे ही कठिन जीवन पर है जिसमें बाधाओं पर जीत हासिल करने की जद्दोजहत बताई गई है। जिन्दगी सफ़र मेरा आसान  न था, ना आसान जिन्दगी जिया मैं कभी। अपनी परेशानियों से  आगे बडा में।  लड़ रहा चुनौतियों से अभी। पता है मुझे अंतिम लश्य यहाँ नहीं।  पर दुनिया छोड़ अभी जाना नहीं।  कहाँ  तक पहुँचा हूँ नहीं पता, बस रूका हुआ सा लग रहा हूँ अभी। आसान ना था पहला पड़ाव पाना, अभी बाकी हैं बढ़ाव सामने कई । कौन जाने कहाँ तक जायेगी। जिंदगी मेरी कब खुलकर मुस्कुरायेगी। अभी बस गीन रहे दिन  यूँ ही,  जिंदगी आसान है ,पर है रूकी हुई। सफर मेरा आसान था भी नहीं,  ना आसान जिन्दगीं जिया मैं कभी। । - कविता रानी।

मैं वापस आऊँगा । main vapas aaunga

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कई  बार हमें अपनी मंजिल को पाने के लिए एक प्रेरणा की आवश्यकता होती है, और कई बार हमें मिले दोखे हमें बहुत प्रेरित करते हैं। यह कविता ऐसे विचार पर जब किसी का किया हुआ बुरा बर्ताव हमें प्रेरित कर रहा हो ।  मैं वापस आऊगाँ  बात छोटी सी है भले।  पर बात दिल पर लगी हैं।। माँगा अपने हक का था। वो कागज ना देना ईमान पर ठगी है।। मेरी मेहनत, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा को धक्का लगा है।  जो कर रहा हूँ मैं  मेहनत, उस पर ये पहरा सा लगा है।  जा रहा हूँ यहाँ से मैं। पर एक अधिकारी बन कर   आऊँगा। कोई भूल जाये मुझे भले।  मैं ना भूल पाऊगाँ।  इन ठगी और लापरवाह लोगों को, सबक सिखाऊँगा।  ये मिले ना मिले,  ये रहे या ना रहे। पर जो दिखेगा इन जैसा, उन्हें बताऊँगा।  मैं वापस आऊँगा।  मैं वापत आऊँगा।। - kavitarani1

बदल गई है तु

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  बदल गई है तु कल तेरा चेहरा देखा। काफी बदल गई है तु।  कुछ याद आया गुजरा कल। हाँ, अब वो कसक नहीं तेरे लिये। ना जगाने कोई जज्बात हैं।  वो जो दिल पर लगने वाली बात थी। वो भूला दी गई हैं अब। देखा तुझे घोर से, पहले सी नहीं है तू। काफी बड़ी दिख रही है, कितनी सही है तु। सब संभाल लिया अच्छे से, होशियार बहुत है तु। कल फोटो देखी तेरी, बदल गई है तु। । - kavitarani1

मैं दोहराता रहूँगा

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  मैं दोहराता रहूँगा  जब तक हूँ मैं दोहराता रहूँगा। अपनी जिंदगी के हर लम्हे बताता रहूँगा।  वो दर्द ही था तो क्या  हुआ।  वहाँ आनन्द  भी था तो क्या।  वहाँ जीवन संघर्ष कर रहा था। हाँ कभी मैं घुट -घुट जीता -जी मर रहा था। वो गये दिन-रात मेरे। वो बित गये अँधेरे भरे सवेरे मेरे।  पर मैं उन्हें भूलाना नहीं चाहूँगा। आखिर कैसे भी हो मेरी कहानी के हिस्से हैं।  मेरे जीवन सफर में बनें वो किस्से है। मैं अनमोल शब्दों से सजाता रहूँगा। मैं जहाँ रहूँ,मैं जैसे रहूँ, उन्हें दोहराता रहूँगा। । -कविता रानी। 

दोस्त वही, Lovely friendship

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  दोस्त वही जो बिन कहे बात समझ ले। दिल में उठे रह जज्बात समझ ले। कहने से पहले ही अपना हाथ दे। विश्वास कभी टुटने ना दे। परेशानी से कभी झूझने ना दे। खुशियों में जो साथ झूमें। मन पङे तब साथ घूमें। जो दिन की रह बात कहे। हो परेशानी तो साथ लङे। नई ऊँचाईयों पर साथ चङे। दोस्त वही जो प्यार बिना प्यारा रहे। दोस्त वही जो मोह बिना मोह करे। दोस्त वही जो मन पङे तब लङे। दोस्त वही जो मन पङे वो कहे। दोस्त वही जिससे नाराज ना रह सके। दोस्त वही जिसे मना सके। हाँ दोस्त वही जो मुझसा हो। दोस्त वही जो मनका हो।। - कविता रानी।

वो रूठी सी है।

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  वो रूठी सी है। दोस्त कहु या सहेली। हाँ पर वो है पहेली। सवाल सारे उसके परिचित है। जवाब से उसके सुचित। मै चित सभाले सुनता हूँ। उसकी बातों से लम्हें बुनता हूँ। वो आजकल कुछ रुखी सी है। लगता है जैसे वो रुठी सी है। बेवजह यूँ दूर जाना किसी का। समझ आता नहीं पर आदत है। हाँ मुझे ऐसे लम्हों की आदत है।। - कविता रानी।

भूल जाऊगाँ।

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भूल जाऊगाँ। धुल उड रही , चीखे गुजँ रही। दौड भाग चल रही, छुपन छुपाई हो रही। पर बस  यादो मे, बस अहसासो मै। जब चाहूँ तब य़ाद करूँ, मे आज कर रहा। मै भूल गया बचपन सारा, जवानी भी भूल जाउगाँ। समय का साथी मै , सारथी यादो का। जब चाहूँ जिस ओर चाहूँँ,लिखूँ बाते। मन मे रखी हुई कई सारी यादे। मै जग के इस चक्रव्यूह से निकल जाउगाँ। आज नही तो कल  मै , तुम्हे भूल जाउगाँ। जैसे भूला बचपन को , ऎसे भूलाऊगाँ। मै तुम्हे भूल जाउगाँ।। - कविता रानी ।

मैं और मेरा संसार । main aor mera sansar

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  कविता में बताया गया है कि कैसे एक एकांत जीवन जीने वाला व्यक्ति अपने संसार में सिमट कर अपने जीवन के लक्ष्य को पाने के लिए मेहनत करता है और संसार की सारी बाधाओं से लड़ता है।  मैं और मेरा संसार। मुझसे मेरा संसार है और मेरे संसार से मैं। दोनों में कोई अंतर नहीं। क्योंकि जब तक मैं हूँ, जैसा मैं हूँ, वैसा ये। पर दोनों विरोधी से लगतें हैं। एक मैं अपनें मन की करना चाहता। और मेरा संसार बस अपनी। एक मैं हूँ जो सब कुछ पाना चाहता। और ये मुझे पाने देता बस कुछ। एक मेरे पास समय नहीं इंतजार का। और इसका समय चलता अपने हिसाब से। फिर मैं कैसे कहूँ कि मैं जी रहा हूँ अपने संसार को। मुझे लगता है ये जी रहा मुझे। मैं पंख उठाऊँ तो तेज हवायें आ जाती है। और दौङना चाहूँ तो काली घटायें छा जाती है। कुछ पल मेहनत करुं तो अंधेरा हो जाता है। चाँदनी रात का आनंद लूँ तो सवेरा हो जाता है। किसी से कहुँ तो वो सुनाता जाता है। अपने लक्ष्य बताऊँ तो राहों में कांटे बिछा जाता है। फिर कैसे मैं अपने संसार को अपना कहूँ। कैसे कहूँ मेरा संसार ही मेरा जीवन है। मैं और मेरा संसार दोनों अलग है।। - कविता रानी।

रुके बैठे हैं । ruke bethe hai

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मन बहुत चंचल होता है। मन की बातें मन ही जानता है। निरंतर मेहनत करते हुए कुछ पल जब हम अपने बारे में, और सपनों के बारे में सोंचतें हैं तो कैसे-कैसे खयाल आते हैं बताती एक सुन्दर कविता- रुके बैठे हैं । रुके बैठे हैं। ख्वाहिशों के पुलिंदों में उलझे बैठे हैं। हम आज मुश्किलों में उलझे बैठे हैं। जीना चाहिए जहाँ आज को हमें। हम कल की फिक्र कर बैठे हैं।। कभी खुद को समझाते हैं। कभी जमानें को समझाते हैं। ये लफ्ज नहीं किस्मत के लेख है। आसानी से समझ कहाँ आते हैं।। एक हम हैं जो हम ही से लङते हैं। जमाना चाहता पिछे रखना और हम बढ़ते हैं। जाहिर है खुशियाँ सांझा करना सब से। पर लोगो की बूरी नजर से डरते हैं।। आसान है सांसे गिनना, हम गिनते हैं। मुश्किल है खुश रहना, हम कोशिश करते हैं। ये दरिया है जो बह रहा बिना रुके। कई छोटे नालों को इसमें समेटे बैठे हैं।। आज फिर खुद से बात कर बैठे हैं। तन्हाई है इसलिए कुछ लिख बैठे हैं। कई सपनें हैं संजोने को जीवन में अभी। हम सही वक्त की दरखास्त लिए बैठे हैं।। - कविता रानी।  

माटी के लाल

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  माटी के लाल ऐ माटी के लाल, माटी के लाल। सुन ले कहे क्या, कहती क्या माँ।। है दर्द सीने में, है बाजु लाल। है माटी के लाल, माटी के लाल।। जंग ना करना, ना जंग लगे लाल। धार बना तेज, तेज करले प्रकाश। देख जिसे बैरी भागे छोङ अपने भाल। शाश्त्र उठा ले, कांधे रख ले शा्ॅल। है माटी के लाल।। - कविता रानी।

मिट्टी में मिला देंगे

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  मिट्टी में मिला देंगे वीर सपुतों की माटी में कायर नी जन्में हैं। लगता है कई शत्रु सोंचते हम भी अन्धे है। वक्त की नजाकत समझ दुश्मनों को जो श्रय देते हैं। कान खोल कर सुनले जो बिन भय के लेटे हैं। मिट्टी में मिला देंगे, जो माटी के बैरी बन ऐंठे है।। ये वीर भूमि है बस वीरों की, यहाँ कायर नहीं जन्मतें हैं। बस माँ भारती के संस्कारों से ही भोले भाले लगते हैं। पर भूल कर भूल ना पाये दुश्मन , कि किस आंचल का हमनें दुध पिया। माँ चंडी और माँ काली का हर पल ध्यान किया। हम नृत्य करके भी दुश्मन को सहमा देते हैं। एक पल भी हमें गलत समझनें की भूल ना करना। मिट्टी में मिला देंगे, जो माटी से हमारी बैर किया।। ये भूमि है रणबांकुरो की, राणा की, शिवाजी की। इसपे जो किसी ने भी कभी वार किया। भूल कर भूल ना पाये दुश्मन कैसे उसका वीर काल बना। राणा की जो तलवार चली, दुश्मन घोङे सहित दो फाङ हुआ। आज भी हम रगो में वही उभाल रखते हैं। शांत है, शांति का मार्ग रखते हैं, पर जो दुश्मन के साथ बैर हुआ। मिट्टी में मिला देंगे, यही उदगार हुआ।। जय माँ भारती। जय हिंद।। - कविता रानी।

माटी रो लगाव

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  माटी रो लगाव मोहे माटी रो चाव, लगाव लागे छोको है। मोहे माटी रो प्रेम , खिंचाव मन लागे है। खिचों जाऊं अपने आप, मनैं कछु ना भाये रे। मोहे माटी रो राग, राग ना कोई भावे रे। मोहे माटी रो लगाव।। तनङो भटक्यो राह, भाव ना खीको चावे है। मनङो बैरी लाग देख, मनकां प अटक्यो चावे है। मनकां म बैरी भरया, बैर रोज दिखावे रे। करणों चाउ माटी को काम, काम खुद को करावे रे। मने माटी रो लगाव।। पग-पग बेङियाँ बांधे, जग जगह-जगह भटकावे है। डग मग - डग मग जीवन, जीवन रह पल डगमगावे है। मुं लूटणों चाहूँ देश ण, जग अपणों स्वार्थ निकलावे है। रह दन मन प बोझ, देश का काम रुकता जावे है। मोहे माटी रो लगाव।। बण सेठ साहूकार भारी, जेब जयचंद भरे रे। अधिकारी रूतबो पाक कोई, मोटो धन कमावे रे। माटी रो मोल भूल बस खुद को नाम बणावे रे। मूं मन को मारयो बैठ अकेलो, आदेशां  नो ताल गाये रे। मन प बोझ भारी राख्यो, देश न खई दयो रे। म्हारो माटी को प्रेम रोज मने उकसावे रे। मोहे माटी रो लगाव।। - कविता रानी।

जय राम जी। jai ram jee

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Jai ram jee - click here to see video जय राम जी। मन मुर्छित, ध्यान भंग  होयो। देख सुरत राम, रवि रोयो।। नीर निरंतर नयन होयो। खुशी का पल म मन खोयो।। नजर एक टक तस्वीर प अटकी। सब दुख - दर्द भूल बस सुरत खटकी।। कसा मनमोहक म्हारा राम सज्या ह। पुण्य भाग पायो, कि दख्यो राम दरबार कसो ह।। फुलां स ज्यादा राम की सुरत प्यारी। भाव नयनां को देख म्हारी हिम्मत हारी।। ह जो सब न्योछावर राम न। बस अब जीवन काम आ जाव राम न।। नमन वा सारा नी, जो मर मिट्या राम को। आशीष, साधुवाद वाई जो ले आया राम को।। मन भारी, तन प्यासो सुरत निहार क। बस अब दर्शन करां, अयोध्या जा क राम का।। जय राम। श्री राम । जय जय राम। भक्त अधुरो करजो पुरो, बाट नाळू राम जी।। जय राम जी। जय राम जी। जय-जय राम जी।। - कविता रानी।  

मनमानी

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  मनमानी मैं सुनता हूँ, लोग सुनाये जाते हैं। बिन पूछे बताये जाते हैं। एक पल रोक अपनी जो कहूँ। लोग मुहं फुला के चले जाते हैं।। मैं कहूँ मदद करने की, लोग लोग रुठे नजर आते है। बिन मांगे कई बार काम में दखल दे जाते हैं। काम बिगङे तो आरोपी बना देते हैं। और काम सँवर जाते तो  वाह वाही लेते है।। जब मैं अकेला रहना चाहूँ तो जीवन में घूसे चले आते हैं। बिन कहे चिपके ही जाते है। जब उदास बैठा मैं, कहूँ मेरे पास आने की। तो लोग व्यस्त होते दूर नजर आते की।। सलाह तो सारी जेब में लिए फिरते हैं। बिन कहे सुनाते ही रहते हैं। जब सही समय पर कहे बताने को। तो मैं क्या जानूं , देख ले, कह भाग जाते हैं।। ये कैसी मनमानी है। ये क्या लोगों ने ठानी है। मुझे नहीं लगता मेरी समझ की है। ना मुझे किसी को समझानी है। पर ये जबरदस्ती की कहानी है। ये मनमानी है।। - कविता रानी।