कौन मेरा तेरे सिवा, kon nera tere siva
Kon mera tere siva - click here to see video कौन मेरा तेरे सिवा कहने को लोग कई होते है सफर में, पर सबसे बातें करने को मन कहाँ । एक ढोर से खिंचा जाता है सबको, इसमें किसी का बस होता कहाँ । लग जाये जिससे बस उसे ही कहनी, भले बातें मन की मन में रहनी है । एक बार को जिससे जुड़ता है, फिर कहाँ ये मन लगता है ।। एक दिल, एक चाह, एक जिन्दगी है, मन की भी राह एक ही तो होती है । चला जो राह किसी की ओर ये, कहाँ फिर किसी की सुनता है । कहने लगा बातें अपनी तुझसे मैं, अब और कहाँ कोई भाता है । खिंचा चला गया पास तेरे जो, अब करे दूर, पर कहाँ ये दूर जाता है । ऐसे ही कोई पसंद नहीं आता सफर में, कुछ तो गुण मिलते है ।। प्यार भले ना हुआ हो कहने में, पर मन में अपना सा ही तो आता है । लड़ता उसी से है कोई जिसे अपना मानता है, झूकता उसी के लिये कोई जिसे खुद से ज्यादा मानता है । जानता है मन कईयों को कहने को, पर कौन मेरा सिवा तेरे तु ही बता । इतना तो जाना है मुझे तुमने, बता "कौन मेरा तेरे सिवा।" Kavitarani1 108