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मन में क्यों सुखा है | man mein kyun sukha hai

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मन में क्यों सुखा है  बारिश है, सब तर है,  हवा शीतल और नम है, खुश है जीव सारे, खुशहाल है आलम सारा, फिर मन में क्यों सुखा है । हवायें तेज है,  बादलों में वेग है,  पर्वत भी नम है, बाहर बङी उमंग है,  फिर मन में क्यों सुखा है ।   शौर है पशु-पक्षियों का, लोगों की अठखेलियाँ है,  आनंद है मौसम का, तन का भी मौज है,  फिर मन को क्या खोज है । बुँदे बारिश की,  सुगंध है मिट्टी की,  गीत है पवन के, हरीयाली की चादर है, आनंद के सुर है, फिर मन क्यों असुर है । मन में क्यों असुर है । मन में क्यों सुखा है ।। Kavitarani1  261