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जयकार हो, jai kar ho

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  Jaikar ho - video dekhe जयकार हो  अंधकार में हो या प्रकाश में, रहे आस ये, कि खास ये, काश ये, ना राज हो। होना है जिसे नाराज हो, पर आपनी जयकार हो। यलगार हो, ना हाहाकार हो, ना बहिष्कार हो । करे जो भला, बला को दान जो उसकी जयकार हो ।  जयकार हो, जयकार हो।। मैं साथ सबके, सजके जाऊँ, जहाँ त्योहार हो । हो कोई धर्म, कर्म प्रधान हो, देश पहले, और देशहित का जहाँ नाम हो, प्रणाम हो, मेरा वही मुकाम हो और साथ सबके, सदके जाऊ, हर बार जाऊँ, सबको बुलाऊ, जयकार हो, मेरे देश की जय-जयकार हो।। अकेले में रहूँ या रहूँ भीड़ में, मैं नीड़ में भी, कहता रहूँ, सहूँ उतना जितना में सहता रहूँ,  ना कहूँ ज्यादा, ज्यादा ना कहने दूँ। सब्र में जीऊँ, कब्र में भेज दूँ जो नकार दूँ। अपनी और अपने देश की जयकार दूँ।  बस जयकार करूँ जय-जयकार करूँ।  जय हिन्द।। Kavitarani1  133

जयकार हो | Jaikar ho

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  Click here to see video for this poem जयकार हो। अपनी आजादी पर सिर कई न्योछावर हुए। लङते-लङते वीरों पर घाव असहनीय हुए। हुए लाल जो शहीद देश पर उनकी शहादत को नमन हो। हर दिन तिरंगे का हो, हर दिन वीरों की जयकार हो।। लङ रहे जो सीमा पर वो वीर हमारी शान है। खङे हैं डटकर पहरे पर वो हमारी आन है। देश की खातिर आखिर कितनो ने ही है जान दी। दी जान जिन वीरों ने उनका सदा सत्कार हो,  उनकी हमेशा जय जयकार हो।। दुनियाभर में भारत मां का जो सिर ऊँचा करते हो। आज की इमारत को ही नहीं, जो इतिहास सहेज रखते हो। कर सेवा जीव जगत मां भारती के मन में जो बसते हो। हर उस भारती के लाल की भी हमेशा जयकार हो। भारत मां के सपूतों की हमेशा जय जयकार हो।। -कविता रानी।