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तुम मिली नहीं | Tum mili nhi

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विडिओ देखने के लिए यहां दबायें - tum mili nhi kavita   तुम मिली नहीं  कितनी सुन्दर कितनी प्यारी,  जैसी तुम वैसी तुम्हारी बातें ।  आखों में चमक गालों पर लाली,  जैसे लगती तुम मेरी आली ।। दुर रह पास का आभास कराती, तुम्हारी बातें मुझे प्यार दिलाती । आभास ही मुझे पास ले जाता है,  मेरा एकांत तुम्हे सोंच कर मिट जाता है ।।  कल्पना कर दिन - रात कटते, हमेशा मिलने को राह तकते । कहे किसे कोई इतना खास कहाँ,  तुम से शुरू बातें तुम पर ही यहाँ ।।  सब कुछ न्योछावर क्यो मैं कहूँ,  एक तुम हो छिपी कहीं दूर हो । पलके बंद कर बस खयाल तुम्हारा, सोंच तुम्हे मन बेसहारा ।। सुंदरता की चाह बस तुमसे पहले, तुम मिलती फिर कुछ नहीं ।  रूक जाती जिन्दगी की ख्वाहिशें मेरी, इसीलिये शायद तुम मिली नहीं ।।  Kavitarani1  78