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नया सवेरा / naya savera

नया सवेरा सुबह तो रोज होती है पर आज कुछ अलग है, अलग है सोंच आज की अलग है विचार आज के। अलग फिर नजरिया है, अलग फिर मौसम है, कल जो खास थे आज हम उनसे नाराज है। कल जिन्हें देख कर सुबह सुहानी मानते थे, आज देखने को कभी उनको जी नहीं करता। कल जिनके हम नगमें, किस्से गुनगुनाया करते थे, आज उनके विचारों, ख्वाबों से भी परहेज करते है। कल जिनसे मन की बात खुलकर करते थे, आज उन्हीं की शक्ल तक देखना नहीं चाहते थे। तभी तो मन बैचेन है भ्रमित कर रहा तन ये, उलझन में समझाये खुद को ये। कह रहा है ये की आज की सुबह नई है, हालात नये है, नयी है रोशनी, नयी है वादियाँ। नये ख्वाब है, उमंग भी ताजा है, ताजा है सपने, फिर क्यों तुम्हें मनाऊँ जब गलती मेरी नहीं है। फिर क्यों ना जीऊँ इस नयी रोशनी में, जो मुझे चमकाने आई है, चाहुँ भुलना भुत को में। क्योंकि आज सुबह सुहानी है।। -कवितारानी।

नया सवेरा चाहिए | Naya savera

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  Naya savera chahiye- click here to see video पुरी सृष्टि परिवर्तनशील है, यहाँ मौसम ही नहीं हर वस्तु व जीव के रुप बदलते हैं। हमें भी हमेशा परिवर्तन की चाह रखनी चाहिए।  नया सवेरा चाहिए  साल बित गये ऐसे ही रहते - रहते, अब कुछ बदलाव चाहिए । बहुत सोचता हूँ  मैं  ऐसे तो, पर कुछ सच में बदलना चाहिए । कड़ी धुप सह लूगाँ मैं,  बस ये अँधेरा हटना चाहिए  । यूँ तो खुब हिम्मत रखता हूँ,  पर अब कोई हमसफ़र साथ चाहिए । पथरीले रास्तों पर चल लूँगा मैं, बस राह दिखनी चाहिए । मंजिल का कोई मोह नहीं मुझे,  बस मुकाम पर मन संतुष्ट होना चाहिए  । बरस बीत गये आस लगाये, अब कुछ परिवर्तन होना चाहिए । खुब जी लिए एकान्त में रहकर, अब भीड़ होनी चाहिए । जी घबराता है शांति में अब, नये सवेरे संग अब शौर चाहिए । कुछ ज्यादा मांगा नहीं मैंने,  बस ये अँधेरा मिटना चाहिए । अब नया सवेरा चाहिए,  अँधेरा मिटना चाहिए ।। Kavitarani1  162

अब नया सवेरा (ab naya savera)

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  समस्यायें जीवन भर रहती है, पर जब हम समस्याओं से नहीं हारते तो जीत हमारी होती है। बाधाओं को पार करने के बाद जब हम देखते है तो हमें सब अच्छा लगता है। कठिनाई से मिली सफलता का अपना एक अलग आनन्द होता है। Click here to see video for this poem अब नया सवेरा।  थी रात लम्बी काली, कट रही थी बन मतवाली। अंधेरे कर पथ सारे मेरे, पथरीले पथ पर टकराते हारे।। हो चोटिल  चलता रहता मैं, भरे अधेरे में  बढ़ता रहा मैं।  आधी कटी आधी रह गयी बाकि,जिंदगी मेरी रही साथी।।  चढते अंधेरे बढ़ती रात संग,अधेरे ने ले लिये थे सारे रंग। थी जंग एक जैसे  जारी, मुसीबत आखिर मुझसे हारी। । घटने लगा ही था अंधेरा, आप मिले नया दिन मिला अब। अब नया सवेरा, अब नयी उमंग, अब हैं नया जीवन। । अब बातें सारी गुजरी पुरानी है, ये नयी जिन्दगानी है।  ये नये जीवन की फेरी है, अब नया सवेरा है। । -कविता रानी।