मैं...कब / Main kab
Click here to see video मैं... कब मैं भी बड़ा मुर्ख हूँ, खुद को खो रहा हूँ- खुद को पाने के लिये, जी सकता हूँ आजाद और, जी रहा हूँ जमाने की सोंच कर । बुरा लगता है खुद को कुछ, पर जमाने को बुरा नहीं लगने देता हूँ, बड़ा मुर्ख हूँ खुद की चिढ़ाई करता हूँ । कह अक्कल को काम लूँगा, जमाने को छोड़ खुद का नाम लूँगा, बढ़ाई सुन झुकना बंद कर, सीना तान हक की माँग करूगाँ, जाने कब अपने मन का ही करूगाँ । सोंचता हूँ दुर हूँ, खुश हूँ, जाने किस बोझ में दबा रहता हूँ, इस बोझ को कब आजाद करूगाँ, मैं कब आजाद होऊगाँ । Kavitarani1 239