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भारत माता जननी है / bharat mata janani hai

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भारत माता जननी है धधक-धधक जल रही अग्नि अवनि है। गौरवशाली भूमि ये भारत माता जननी है। करनी अपनी इस धरा को हर युग भरनी है। विश्व विधाता ज्ञान दाता भारत माता जननी है। अग्नि ज्वाला ज्योति हर कोने जग उतरनी है। ज्ञान सागर भारत भूमि हँस वाहिनी है। रस अमृत प्रेम, पताका शाँति की स्त्रोत स्विनि है। श्री शिरोधरा अमृतसार सी भारत माता तरंगिणी है। विधु वैभव निशा छाकर बढ़ती रहनी ही रहनी है। गौरवशाली भारत भूमि ज्ञान की जननी है। तमस् वयस् बहत् घटत बढ़ती जो वहनि है। ओज रोष हटत् रहत जो ज्वाला बननी जननी है। गौरवशाली भारत भूमि जल रही अ्ग्नि अवनि है। भारत माता भाग्य विधाता भारत भूमि जननी है।। -कवितारानी।

जागो ऐ देश के युवक / jago e desh ke yuvak

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जागो ऐ देश के युवक इस मिट्टी से उपजे, इसका गुणगान करो। जग भ्रम में ढुब रहा, जागो युवा ललकार करो। ललकार करो कि हिल जाये चट्टानों से इरादे वो। गाते रहते दिल्ली में टुकङे के इरादे लेकर जो। कोई जिन्ना आके फिर भारत का ना मान हरे। जागो ऐ भारत के युवक विनती हम आज करें।। ना केसरिया मटमैला हो ना हरा गायब होने दो। समझो चक्र कि किमत श्वेत का गुणगान करो। अँन्धकार फैला है सब ओर सोशल साइट नाम पर। गुणगान करो ज्ञान का ना किसी का अभिमान करो। जागो ऐ देश के युवक देश का तुम उध्दार करो। जो देखा सपना गाँधी, कलाम ने उसे तुम साकार करो।। सोया है आज तेरा, मन, मस्तिष्क निस्तेज है। बदलती करवटों में क्यों केवल दीवानगी है। दिवास्प्न से उठ जरा अपनी भारत माँ का नाम। बदलते परिवेश में विकास का पथ पान करो। जागो ऐ देश युवक देश का तुम नाम करो। ज्ञान ज्योत जलाकर खुद में देश का उध्दार करो।। वो भारत भाग्य विधाता उद्गार कर रहा। आज को सोंच रहा, आज को गा रहा। इस आज की, आँच से कल का स्वप्न साकार हो। बनती बिगङती बातों से खुद को करे आजाद हम। देश के उध्दार में हो भागीदार हम। जागो ऐ देश के युवा देश का उध्दार करो।। -कवितारानी।

ये भारत देश क्या चाहता है / Ye Bharat desh kya chahta hai

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ये भारत देश क्या चाहता है। युवा दिवस है ये 12 जनवरी का, भारत जन इसे मनाता है। युवाओं का जोश बढ़ाने वाला, युवा दिवस मुझे बहोत भाता है। जन प्रचलित जर में युवा क्या-क्या ना गाता है। पर भारत जन (लोगो) जानों ये भारत क्या चाहता है। ये भारत क्या चाहता है। देख हवा आज की क्या-क्या ना मन में उपजा है। बिन बारिस बह रहा, मन मेरा समझ ना पाता है। ना मिट्टी का रंग बदल पाये, आसमां वे साया है। फिर आज के युवा को, क्यों हरा, पीला भाया है। खङा तिरंगा सिर उठाके, ना मुझमें, तुझमें भेद करें। फिर क्यों गाय, बकरी को जग में हम भेंट करें। मोल करे देशभक्ति का किसको ये आता है। है भारत जन के युवा जानों ये भारत देश क्या चाहता है। ये भारत क्या चाहता है। ना तेरा, ना मेरा, ये देश है सबका जान लो। इस माटी की खुशबु में देशभक्ति को पहचान लो। माता है यो खिलाती है अन्न, फल हम सबको। पीते है निर्मल नीर नहीं भेद करती किसी को। फिर क्यों वन्दे गान करें, जयकार करे हम इसको। ऐ भारत जन जान लो हम जयकार करें इसको। यही इसको भाता है यही इसको भाता है। ऐ भारत ये समझ जाओ ये भारत यही चाहता है।। -कवितारानी।

माटी के लाल

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  माटी के लाल ऐ माटी के लाल, माटी के लाल। सुन ले कहे क्या, कहती क्या माँ।। है दर्द सीने में, है बाजु लाल। है माटी के लाल, माटी के लाल।। जंग ना करना, ना जंग लगे लाल। धार बना तेज, तेज करले प्रकाश। देख जिसे बैरी भागे छोङ अपने भाल। शाश्त्र उठा ले, कांधे रख ले शा्ॅल। है माटी के लाल।। - कविता रानी।

मिट्टी में मिला देंगे

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  मिट्टी में मिला देंगे वीर सपुतों की माटी में कायर नी जन्में हैं। लगता है कई शत्रु सोंचते हम भी अन्धे है। वक्त की नजाकत समझ दुश्मनों को जो श्रय देते हैं। कान खोल कर सुनले जो बिन भय के लेटे हैं। मिट्टी में मिला देंगे, जो माटी के बैरी बन ऐंठे है।। ये वीर भूमि है बस वीरों की, यहाँ कायर नहीं जन्मतें हैं। बस माँ भारती के संस्कारों से ही भोले भाले लगते हैं। पर भूल कर भूल ना पाये दुश्मन , कि किस आंचल का हमनें दुध पिया। माँ चंडी और माँ काली का हर पल ध्यान किया। हम नृत्य करके भी दुश्मन को सहमा देते हैं। एक पल भी हमें गलत समझनें की भूल ना करना। मिट्टी में मिला देंगे, जो माटी से हमारी बैर किया।। ये भूमि है रणबांकुरो की, राणा की, शिवाजी की। इसपे जो किसी ने भी कभी वार किया। भूल कर भूल ना पाये दुश्मन कैसे उसका वीर काल बना। राणा की जो तलवार चली, दुश्मन घोङे सहित दो फाङ हुआ। आज भी हम रगो में वही उभाल रखते हैं। शांत है, शांति का मार्ग रखते हैं, पर जो दुश्मन के साथ बैर हुआ। मिट्टी में मिला देंगे, यही उदगार हुआ।। जय माँ भारती। जय हिंद।। - कविता रानी।