मैं तुम्हारे लिये लिखना चाहूँ
मैं तुम्हारे लिये लिखना चाहूँ मैं तुम्हारे लिये कुछ लिखना चाहूँ । जुड़ा तुमसे किस कदर बताना चाहूँ। मैं तुम्हारे लिये कुछ नगमें बनाऊँ। । हाँ ये आसानी से कर सकता हूँ मैं । दिल से निकले शब्दों को सीधे लिख सकता हूँ मैं। तुमसे जुड़ाव भी तो गहरा है । कहीं छुपे रहे कर मेरे एकांत पर तुम्हारा पहरा है। मैं अपने लम्हे तुम्हारे नाम करना चाहूँ। सुनूं तुम्हारी और खुब अपनी कहना चाहूँ। मैं तुम्हारे साथ जीना चाहूँ। । बड़ा वज़न होता शब्दों में। दिल के कई भाव होते हैं इनमें। मैं अपने दिल के भावों को तुम्हारे लिए कहना चाहूँ। हाँ में कभी-कभी ज्यादा सोचता हूँ। मैं हर सोंच को तुम्हारे लिये लिखना चाहूँ। । Kavitarani1 17