खिंच ना तार | Khinch na taar
खिंच ना तार मोहब्बतां के तार ना खिंच कुड़िये, सुर मेरा बिगाड़ दिया है । आँख विच सुरमां चढ़ाके छोरिये, आशिक का दिल मार दिया है । होती दूरियाँ मन समझ रहा, दूरियाँ ना किस्सा सुनादे बलिये । मोहब्बतां के तार ना खिंच सोनिये, दिल दा गिटार टुट रहा है । चाहिए ना कुछ-कुछ ना देवे, मिठ्ठा-मिठ्ठा बोल सुनादे माही वे । हुण रेण दे गले लगना, छुने की कोई गल रहन दे । होंठा नू लगा के रंग गोरिये, प्यारी सी मुस्कान दिखा दे बलिये । गलती होवी जो माफ करिजें, बोरियत मेरी तू भूल जा सोनिये । देख मोहब्बत का खुमार छोरिये, ला के दूँ जो मांगे एक बार बोलिये । रूठ ना बेवजह ऐसे तू , गलती हो तो सुना छोरिये । मोहब्बतां के गिटार नूं बजा कुड़िये, मधुर धुन तू बना दे सोनिये । खिंच ना मोहब्बतां के तार ज्यादा तू, सुर नूँ चलने दे प्यार भरे सोनिये ।। Kavitarani1 163