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अग्नि देव | Agni dev

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Click here to see video अग्नि देव   देव लोक सब देव विराजे, मृत्यु लोक पाप भारी। कोई दाह कर पुण्य पाये, कोई भस्म लगा भोला भारी। सब मिटे राख होकर, अंत समय सब खाक है। मत कर अभिमान; मान कहना, अग्नि देव महान है। थे पूर्वज ज्ञानी, बङे विज्ञानी,  हवन किये सुबह-शाम वे। तन कि ज्वाला, मन की अग्नि, करते स्वाहा सम्मान से। है त्रिनेत्र में, है पृथ्वी के गर्भ में,  है उदर की आग ये। मत कर अभिमान;मान कहना, अग्नि देव महान है। है प्रलय के पहले वो, है प्रलय के बाद,  सृष्टि के निर्माण में वो, है सबके निर्वाण के बाद। मृत्युलोक के वियोग में साथी, स्वर्गलोक के साथी वो। मत कर अभिमान; मान कहना, है अग्नि देव महान। जग ने कब महिमा मानी, अग्नि कुण्ड की परीक्षा जानी। देव पाठ में अधूरी भक्ति,  हवन कुण्ड से बङती शक्ति।  पूजा में दीपक जलाते, अग्नि देव संग ही आराधना करते है। इसलिए हम कहते है, अग्नि देव महान है ।। -कविता रानी। 

पगडंडीयाॅ | Pagdandiya

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Click here to see video   पगडंडीयाॅ     दुर्गम पथ, दरिया-बाधाएं,  पहाड़ी जमीन,  कंटीली राहें। उपवन की सैर में, मंदिर की फेर में, मैं आगे बङी,  पगडंडीयों पर चली। जब रास्ते बंद हो जाते हैं,  पथ भ्रमित कर जाते हैं, सङके जर-जर हो जाती है,  तब पगडंडीयाॅ याद आती है।  मृदुल ये नम मिट्टी से, मखमली नरम घांस से, मनमोहक हरियाली  से, आसान है चलने में। मन में जगह बनाती है,  मंजिल को पहुँचाती है, रास्ते आसान करती है,  पगडंडीयाॅ बहुत काम आती है। । जीवन सफर में कई मोड़ पर रास्ते कठिन हो जाते हैं। उन रास्तों पर चलना तो चुनौती होते ही हैं, मंजिल की कोई गारंटी नही होती। ऐसे समय हमारे काम जो आये और हमारे जीवन को शार्टकट देकर, रास्ते को आसान कर दे वही हमारी पगडंडी है। -कविता रानी। 

विरासत | Virasat

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  Click here to see video विरासत। देश नहीं बदलते, ना देश की धरोहरें। जो छोङ जाते हैं अपने -अपनों के लिए,  वही कहलाती है विरासतें। । ये कोई आज की इमारतें नहीं,  ये कोई खंडहर, विरान नहीं।  ये हमारी संस्कृति है, ये हमारी विरासत है।। ये धर्म स्तंभ है, ये धर्म ध्वजाऐं हैं।  ये चिन्ह है हमारे पूर्वजों के, ये हमारी विरासतें हैं। । कोई दबी है रेगिस्तानों में,  कोई छुपी हुई है हिमालयों में।  कुछ अछुती है अभी भी जग से, कुछ बन चुकी विश्व धरोहर है। । ये प्राचीनकाल अभिलेख हैं,  ये मानवता के लेख हैं।  आओ! हम गुण गान करें,  अपनी विरासतों पर अभिमान करें।  -कविता रानी। 

आदिनाथ | Aadinath

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Click here to see video   आदिनाथ देवताओं के देव है, मेरे प्रभु महादेव है। कालों के काल है, मेरे प्रभु महाकाल है। है धरा उनकी, है नभ सारा उनका। वो कण-कण बसते, वो जन-जन में बसते। दीनों के दयाल है, मेरे प्रभु दीनदयाल है। नाथों के नाथ है,  मेरे प्रभु आदिनाथ है। । है डमरू हाथ, त्रिशूल साथ। नाग गले में धरते हैं।  है सिर पर चाॅद, त्रिनेत्र ऑख, बाघों का बिछोना करते हैं।  नंदी की सवारी,  देव-दानव पुजारी,  हर-हर में बसते हैं।  कर भस्म बेर, शमशान शेर, आदि योग में रहते हैं।  है आरंभ शिव, है अंत शिव, शिव ही सत्यम, सुन्दर है। कर अमृत दान, हालाहल पान,  सृष्टि के पालनहार है। कालों के काल,  है महाकाल,  मेरे प्रभु आदिनाथ है। । -कविता रानी। 

सहारा | Sahara

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Click here to see video सहारा। नोकायें लहरों पर सवार कर, बहती धारा को पार कर, भूल ना जाना राही के; था नाविक कौन? था पुल कौन? वो जो दुर्दिन में काम आते है।  वो जो तेज धार पर चढ़ जाते है।  वो सहज ना सबको मिल पाते है।  वो देव दूत कहलाते है।  तुम अपना मार्ग सुगम कर, बहते दरिया को पार कर, भूल ना जाना राही के; था सहारा कौन ? था मुश्किल में साथ कौन ? जीवन सफर में हमें कई तरह के लोग मिलते हैं, इनमें से कुछ हमारे जीवन को ऊर्जा देने का काम करते है और हमें मुश्किल समय से उभारनें का काम करते हैं । यह कविता हमारे जीवन के उन्हीं सहारा देने वाले लोगों के ऊपर हैं । - कविता रानी। 

झील किनारे | Jheel kinare

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  Click here to see video झील किनारे बन दो पंछी छांव ढूंढे, एक दूसरे में आस ढूंढे, कभी शहर किनारे,  कभी झील किनारे,  हम समय बिताये बन मतवाले। कौन, क्या  सोचे, फिक्र क्यों ? किससे, क्या लेना, जिक्र क्यों  ? हम अपने दम पर, अपने किराये, शांत रहे, बैठे- घूमें,  झील किनारे। । -कविता रानी। 

तपस्वी | Tapaswi

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  Click here to see video आसान नहीं तपस्वी होना। एक शिखर पर दिख रहा, समाज को बहुत जच रहा, लग रहा आसान होगा, पर अनजान को समझाना होगा, आसान नहीं तपस्वी होना।  -कवितारानी। 

मनमौजी बने | manmauji bane

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  Click here to see video Manmauji bane रुकसत ऐ उम्र, जहां ख्वाब देखता है। झोंपड़ी के सुख छोड़, महल देखता है। नादां नहीं परिंदा आशियाने देखता है। बंदिशे नहीं सोचनें पर, ख्यालों मेें रहता है। बस गुजरते वक्त की ना कदर करता है। रुकसते उम्र जहां ख्वाब देखता है। । -कवितारानी 

वो बात मेरे मन की।

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     वो बात मेरे मन की | vo bat mere man ki Click here to see video for this poem जीवन में कभी कभार ऐसी बात मन में उठती है जिसे हम अपने सबसे प्रिय व्यक्ति को ही बताना चाहते हैं और सबसे उस बात को छुपाये रखते हैं, तब तक वो बात मेरे मन की इस प्रकार का असर रखती है; वो बात मेंरे मन की  अक्सर जिसे छुपाती, किसी को नहीं बताती, सपनों में जिसे जीती, ख्यालों में पिरोती। वो कहीं से उभर आती है,  मेरी ऑखों में दिख जाती है, वो मनमोहक सी लगती है, वो तस्वीर सी दिखती है। वो मधुरता लिए होती है, वो प्रेम लिए होती है,  वो बात मेरे मन की, वो बात किसी खुशी की।। - कवितारानी