संदेश

poem kr लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जो तुम पास हो। (jo tum pas ho)

चित्र
 जो तुम पास हो। जख्म पुराने सँवर गये।  यादों के पर्दे बदल गये। छायी थी जो धुल जीवन में।  वो बनकर हवा गयी कहीं वन में।  मैं अब आबाद महसूस करने लगा हूँ।  सादा जीवन जीवन जीने लगा हूँ।  जो तुम आये हो साथ में । जो तुम हो पास में।। मैं नये तराने लिखने लगा हूँ।  नये किस्से,कहानियाँ गढ़ने लगा हूँ।  यादों में सोंचा करता था जिसे मैं कभी।  उसे तुझमें देखने लगा हूँ।  अब वो किरदार साथ है।  ख्वाबों की सारी बात याद हैं।  अकेले में लिखे जो नज्मे-किस्से। अब वो बस एक राज हैं। । भूला ना कुछ-याद नहीं हैं कुछ।  साथ है सब-चाह नहीं ज्यादा अब। जीवन कुछ आसान लगने लगा है।  सब कुछ सच लगने लगा है ।  यही तो चाहा था सपनों में कभी।  जो तुम पास हो सब अपना लगने लगा है । सब सच लगने लगा है। जो तुम हो पास, जो तुम हो पास।। -कविता रानी। 

जीये जब मान से (jiye jab maan se)

चित्र
  जीये जब मान से। बिन गलती के सुन लिया, काम जो दिया कर लिया। अपने हित को छोङ दिया, कर्म पथ को जो जिया। जीये जब मान से तो, सम्मान को चुन लिया। किया कुछ गलत नहीं, फिर भी गलत सुन लिया। जीये जब मान से तो, मन को मार जीया। किया जो वक्त  का किया, खुद को खुला छोङ दिया। फैसला अब समय करेगा, समय ही जब भाग्य हुआ। जीये जब मान से तो,  सब भूल गया।। -कविता रानी।

एकांत में। (shayari/ quotation)

चित्र
  एकान्त में••• अचरज नहीं हुआ कि तुने अपना असली रूप दिखाया। तुझे देख हीं संकेत मिल गया था कि तु दोखा देगा।। जहाँ अपने सगे-सगे ना बने रहे वहाँ तुझसे क्या उम्मीद करुँ। तु तो रक्त और जमीन से भी पराया है तेरा क्या विश्वास करुँ । कुछ खास है मेंरे सपनों में जो मुझे सोने नहीं देते। जब पाने को इन्हें मेहनत करुँ तो यही है जो रोने नहीं देते। एक मुकाम मिला है मिन्नतो के कबुल होने से। वरना मेहनत करते-करते तो सालों हो गये ।। लोग कहते है सब मेहनत से मिलता हैं।  पर जब भी पलट कर देखा पाया जैसे सब लिखा लिखाया है।। अपनी कलम और डायरी से सच्चा मित्र कोई बन ना पाया।  जो आया इसके सिवा, वो बस अपने स्वार्थ से आया।। कुछ खास नहीं बस अफसोस करते है।  पता है ये भी धोखा देगी, पर बात करतें हैं। । खुद ही लड़ना और खुद ही रुठ जाना, क्या ही फितरत है।  लडकियों की समझ से परे इनकी आदत है।। अगर कोई कहे मुझे दुनियाॅ हसीन दिखती हैं।  तो मैं कहूँगा तुझसे ख़ुशनसीब कोई नहीं हैं।  कोई दावा करे कि उसने असली प्यार पाया है।  तो मैं उसे लाख बधाई दूँगा कि क्या नशीब पाया है।। आसान है भरोसा पाना कि...

मुकाम (mukam)

चित्र
  जब कठिन परिश्रम कर हमें अपनी मंजिल मिल जाये तो हम किस प्रकार से महसुस करते हैं बताती एक सुन्दर मनमोहक कविता। मुकाम अब मुकाम मिल गया। जो चाहा था बचपन में कभी। वो सहारा बन गया। आज खङा हूँ जिस जगह मैं। आज पाया है आशियाना जो। वो सपना मेरा मिल गया। लग रहा अब मुकाम मिल गया। अब बंदिशे ज्यादा नहीं। अब बोझ ज्यादा नहीं। देख रहा हूँ जहाँ से मैं। लग रहा जीवन सफल हो रहा। आज खङा हूँ जहाँ। लग रहा मुकाम मिल गया।। - कविता रानी।