संदेश

मैं अभागा लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मैं अभागा | main abhaga

चित्र
मैं अभागा  जग में भागा - भागा फिरता हूँ । मैं अभागा - अपने भाग से फिरता हूँ ।। ठोर तलाशता, मैं जागता और सोता हूँ । अपनी उम्मीदों को समेटता, मैं मिटता और गाता हूँ ।। मोह का धागा - धागा बुनता हूँ । मैं अभागा - अपने भाग्य से लड़ता हूँ ।। छोर घूमता मैं, उस ओर घूमता मैं । अपनी मंजिल का पता पूछता रहता मैं ।। मन का मारा, बेसहारा फिरता हूँ । मैं हारा, विजय पथ की पूछता हूँ ।। एक अधूरा बनना चाहूँ पूरा, मैं जग घूमता हूँ । अपनी अमर कहानी लिखने को मैं ढोलता रहता हूँ ।। मायाजाल से दूर रहता, खुद मन जाल में उलझता हूँ । अपनी कथनी पूरी करने को, मैं कर्म पथ पर चलता हूँ ।। मैं अनाथ, अपना नाथ खोजता हूँ । साथ मिले मन का बस यही कोशिश करता हूँ ।। इस जन - कभी उस जन मैं चलता रहता हूँ । मन की आवाज के दबाता मैं आधी राह चलता हूँ ।। जग का भागा, मैं अभागा फिरता हूँ । अपनी मंजिल की तलाश को चलता रहता हूँ ।। Kavitarani1  54