यादों में | Yadon main
यादों में - विडियो देखे यादों में करवटों में रात बिती, यादों में दोपहर । आपकी यादों से निकले कैसे लगती है ये कहर ।। दिन लगते है छोटे जैसे हो कोई पहर । कहने को है सब साथ पर हो जैसे जहर ।। आसान नहीं रहना यहाँ गाँव हो या शहर । फिर अकेले दिन मुश्किल कर देता है पहर ।। हो चुका हूँ आदी दुखो का इनका नही असर । पर आ चुकी है यादें सामने कैसे ना हो असर। । यादों में खोये बैठे है बीती नहीं चार दोपहर । हर दिन लगने लग गया है जैसे हो कहर ।। Kavitarani1 195