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जैसा तुम कहो / jaisa tum kaho

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  जैसा तुम कहो  प्यार नी होना फिर, बात नी होनी । कहने दे जो तुझको है कहनी । अब वापस में आऊँ और कहूँ बात जो तुम्हें सुननी । जैसे तुम कहो अब वो बात नी होनी । सुन ली बहुत, अब सुननी नहीं । दूर-दूर, रह-रह दूरी ही रखनी । बनायी थी जो बात अब बिगड़ गई । जैसा तुम कहो, अब मुझे नहीं कहनी । सीधी-साधी चल रही, चलने ना दी । मासुमियत मेरी, तेरे दिल में नी गयी । दोस्तों के चक्कर में खोई रही । अच्छे से रहते - रहते बुरी हुई । यही तुम्हें पंसद तो यही सही । जैसे तुम कहो, वैसे ही होनी । अब बात खत्म बस यही कहनी ।। Kavitarani1  285