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गूढ़ सत् | Gud sat

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Click here to see video - to listen it गूढ़ सत्  सत् -सत् जप बस, रूस एक सच पिया नही जाता । राम-राम भज बस, राम एक सहा नहीं जाता ।। हिन्द-हिन्द कहे बस, हिन्द एक समझ नहीं आता । धून -दूर भजे बस, दूर एक पल चल रहा नहीं जाता ।। मिठे-मिठे बोल बस, मिठा एक खाया नहीं जाता । तिखे-तिखे दिखे बस, तिखा एक दिन रहा नहीं जाता ।। शुल-शूल देखे बस, शुर एक पास नहीं भाता । सुर-सुर ढुंढे बस, सुर एक समझ नहीं पाता ।। अंध-अंत तप बस, अंध एक जिया नहीं जाता। मंद-मंद रम बस, गंद एक मन नहीं भाता ।। सत्-सत् जप बस, सत् एक समझ समय गुजरता जाता ।। Kavitarani1  141