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हिमाचल की यादें | Himachal ki yadein

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  Click here to see video हिमाचल की यादें वो गर्मियों की छुट्टियाॅ। वो हिमालय की मनमोहक वादियाँ।  वो पहाङों  के पेङ अलग। वो पहाङों पर की अठखेलियाँ अलग। वो पहाङी पगडंडीयों पर चलना। वो विदेशी पर्यटकों से मिलना। वो हिमालय की शीतल पवन। वो बादलों में की सेर अलग। खाली बैठे लम्हों में खो जाता हूॅ। मै हिमाचल की यादों में खो जाता हूँ। - कविता रानी।  

हो सशक्त तुम / Ho sashakt tum

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Click here to see video for this poem   हो सशक्त तुम  ना अबला हो, ना निर्बल तुम।  हर युग की तस्वीर तुम। हो हर घर की तकदीर तुम। ना समझो खुद को कमजोर तुम। हो सशक्त तुम, हो सशक्त तुम। । ये युग बदलते देखें हैं । ये जग बदलते देखे हैं।   मैंने कईं मंजर बदलते देखें हैं।  देखी हर कई तस्वीर ये। हो भाग्य तुम, हो सशक्त तुम ।। तुम बिन घर -ऑगन सुने हैं।  तुम बिन परिवार अधूरे हैं।  तुमसे ही रोनक मंदिर की। तुमसे शान देश-दुनिया की। तुम्ही मूल हो, तुम्ही शक्ति हो।। तुम सहती हो, सहनशील तुम।  तुम कर्मठ हो, कर्मशील तुम। तुम ममता हो, ममत्व तुम। तुम देवी हो, दिव्य तुम। तुम शक्ति हो, सशक्त तुम। । कोई युग भूल ना पायेगा। अनदेखा कर रह ना पायेगा।  तुम नहीं तो मानवता नहीं।  तुम नहीं तो कुछ नहीं।  है सत्य यही, ये जग सशक्त तुमसे ही।। -कविता रानी। 

झील किनारे | Jheel kinare

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  Click here to see video झील किनारे बन दो पंछी छांव ढूंढे, एक दूसरे में आस ढूंढे, कभी शहर किनारे,  कभी झील किनारे,  हम समय बिताये बन मतवाले। कौन, क्या  सोचे, फिक्र क्यों ? किससे, क्या लेना, जिक्र क्यों  ? हम अपने दम पर, अपने किराये, शांत रहे, बैठे- घूमें,  झील किनारे। । -कविता रानी। 

गंगा मैया / Ganga maiya

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Click here to see video   गंगा मैया।  पाप नाशनी, ताप नाशनी,  कलरव करती तेरी धारा। नित वाहिनी,  पितृ वाहिनी, सधानिरा तेरी धारा। शीतल पेय, औषध लेय, निर्मल करती काया। जय गंगा मैया।  जय जय गंगा मैया। । देव हो, दानव हो, सबको तुमने अपनाया। वरदान हो, अभिशाप हो, सब तुझमें समाया। नर हो, नारी हो, सबको नारायण मिलाया। तुझमें शक्ति,  तुझमें भक्ति,  कौन तुझ बिन पूरा हो पाया। जय गंगा मैया।  जय जय गंगा मैया। । हो उदास, या भर उल्लास, जो कोई तेरे तट आया। भर उमंग, हो नव संचार,  एक पथ बढ़कर पाया। शांत मन, शीतल तन, हर मानव हर्षाया।  तेरी कृपा अपार, तेरी माया अपार, गाँव-गाँव घर-घर मेें तुझे पाया। जय गंगा मैया।  जय जय गंगा मैया। । हो भाव ब्याह का, हो बाव गाँव की, हो चरी घर की, हो रस्म मंदिर की। ना निर्मल तुझसे कोई पाया, ना पवित्र तुझसे कोई पाया, ना भेद तेरा समझ आया, ना मैल दूर तक समझ आया। क्या है महिमा? क्या है गरिमा? सब तुझसे, सब तुझमें, मैया। जय गंगा मैया।  जय जय गंगा मैया। । - कविता रानी।  

मनमौजी बने | manmauji bane

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  Click here to see video Manmauji bane रुकसत ऐ उम्र, जहां ख्वाब देखता है। झोंपड़ी के सुख छोड़, महल देखता है। नादां नहीं परिंदा आशियाने देखता है। बंदिशे नहीं सोचनें पर, ख्यालों मेें रहता है। बस गुजरते वक्त की ना कदर करता है। रुकसते उम्र जहां ख्वाब देखता है। । -कवितारानी 

वो बात मेरे मन की।

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     वो बात मेरे मन की | vo bat mere man ki Click here to see video for this poem जीवन में कभी कभार ऐसी बात मन में उठती है जिसे हम अपने सबसे प्रिय व्यक्ति को ही बताना चाहते हैं और सबसे उस बात को छुपाये रखते हैं, तब तक वो बात मेरे मन की इस प्रकार का असर रखती है; वो बात मेंरे मन की  अक्सर जिसे छुपाती, किसी को नहीं बताती, सपनों में जिसे जीती, ख्यालों में पिरोती। वो कहीं से उभर आती है,  मेरी ऑखों में दिख जाती है, वो मनमोहक सी लगती है, वो तस्वीर सी दिखती है। वो मधुरता लिए होती है, वो प्रेम लिए होती है,  वो बात मेरे मन की, वो बात किसी खुशी की।। - कवितारानी