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अनजान ही अच्छा | Anjan hi achha

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Click here to see video - Ajanabi अनजान ही अच्छा  हर मन दबा हुआ जहर से खुद के, दिखावे में मिठास भरा हुआ ।  मुस्कान झुठी ले चल रहा, गहरा लिये जख्म चल रहा । हर दिन एक नया रूप बदलता । चेहरा एक जो लिया हुआ ।  विश्वास करूं किस पर यहाँ,  भ्रम में है संसार भरा पड़ा ।  अनजान था बचपन में सबसे,  लग रहा था अनजान ही अच्छा,  नादान था बचपन में अच्छा ।  अच्छा है बना हुआ हूँ अब भी नादान यहाँ ।  हर तन ढका हुआ है यहाँ, दिखावा किया जा रहा । हर चेहरा है छुपा हुआ ।  हर मुस्कान झुठी है यहाँ,  हर दिन मुश्किल हो रहा, सब जानकार में इनकार हो रहा । अनजान ही अच्छा था मैं,  अनजान ही अच्छा ।। Kavitarani1  72