तु और तेरी बातें, Tu aor teri batein
तु और तेरी बातें पढ़ता - रहता कहता ना था, अकेला था पर, अब सहता ना था । दिन गये बित, वो जिन्दगी की शीत भी । अब ऋत बदल गयी, और रातें भी । पर एकान्त में याद आती है, तु और तेरी बातें ।। क्या गजब थी अपनी मुलाकातें । वो झट से तेरा मुस्कुराना । तेरी मस्त आवाज, और मेरा गाना । याद आ रही है, तु और तेरी बातें । अधुरी रह गई वो रातें । तु और तेरी बातें ।। जरा याद कर वो एक दिन, मैं था अकेला जब तेरे बिन, मैं साँप सा तङप रहा था, जब कुछ घडियाँ साथ बिताई, पहली बार तुमने जान बचाई, फिर से कृपा काम आई, फिर तेरा था मुस्कुराना, होंसला देना और गले लगाना, भूले भूलाया ना जाता है, अकेले में याद आता है, कि कैसी थी तन्हाई वो, तु और तेरी बातें वो ।। वो सर्दी का मौसम था, तु पास बैठी थी, देख तुझे पास मैं दंग रह गया, शर्माई तु और में बह गया, परवाह ना कि लोगों की, या शायद मैं तुझमें खो गया, याद है मुझे तबकि सारी, तु और तेरी बातें ।। वो दिन जब तुमनें मुझे याद किया, वाट्स एप्प से मेरे मैसेज किया, मैं तेरे लिए था दौड़ा आया, गले लगाकर प्यार पाया ।...