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स्काउट बनो

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  स्काउट बनो। प्रकृति की गोद में अगर सिखना है। जीवों के हित को अगर सोंचना है। अपनें देश, धर्म से जूङे रहना है। मानवता को अगर निखारना है। तो स्काउट बनो। स्काउट बनो।। यहाँ प्रशिक्षण नहीं, प्रकृति से जुङते हैं। मोज और खोज में रमते हैं। रोज नये खैल खेलते हैं। व्यस्तता में मस्त रहना सिखते हैं। यहाँ कुछ दिन में जीवन के स्काउट बनते हैं।। देश की माटी का लगाव दिखता है। यहाँ नई  प्रतिभाओं का ज्ञान दिखता है। नये जीवन उपदेश यहाँ मिलतें हैं। हर जीवन के अनुभव सुनने को मिलतें हैं। यहाँ कई स्काउट मिलतें हैं।। विश्वसनीयता का भाव यहाँ जगाया जाता है। वफादारी का पाठ पङाया जाता है। भाईचारे की सिख दी जाती है। यहाँ साहस, प्रेरणा की बात की जाती है। स्काउट में गुणों को निखारा जाता है।। बिन छत बिस्तर के रहते हैं। हाथ से खुद बनाकर खाते हैं, पैदल चाल का आनन्द लेते हैं। इशारों को सिखते हैं, नये-नये गठजोङ सिखते हैं। स्काउट में नये-नये खैल, गीत, नीनाद सिखते हैं। इसीलिए कहते हैं. जीवन को करना है आसान तो, स्काउट बनो। स्काउट बनो।। -कविता रानी।  

दुर्लभ | Durlabh

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  Click here to see video दुर्लभ   वक्त-बेवक्त इत्तेफाक कई। मतलब-बेमतलब बातें कई। कई किस्से कहांनियाँ है बन रही। मै चाहूँ या ना चाहूँ कहना, मेरा आप ही कह रहा यही।। कोई खास नहीं, कोई पास नहीं। बंद ऑखो से कर सके विश्वास,  ऐसे इंसान कहीं मिलते नहीं।। ना है खुद्दारी, ना ही ईमानदारी कहीं। ना है सोंच, ना विचार कहीं। पहन रखे अपनेपन के मुखोटे बस। अपनेपन का कहीं अहसास नहीं। बेवजह एकांत की वजह ढूँढता हूँ। शांत जगह की है आस मेरी। साफ मन के लोग कहीं मिले नहीं। मैं ना न्याय चाहता, ना न्यायाधीश।  ना ईश्वर दूत चाहता, ना ईश। मैं बस समय साध इंसान चाहता, और कुछ नहीं। है दूर्लभ खोज मेरी, रहनी है अधूरी खोज मेरी। जैसे इंसान मै खोज रहा, है वो यहाॅ दूर्लभ ही।। - कविता रानी।

अग्नि देव | Agni dev

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Click here to see video अग्नि देव   देव लोक सब देव विराजे, मृत्यु लोक पाप भारी। कोई दाह कर पुण्य पाये, कोई भस्म लगा भोला भारी। सब मिटे राख होकर, अंत समय सब खाक है। मत कर अभिमान; मान कहना, अग्नि देव महान है। थे पूर्वज ज्ञानी, बङे विज्ञानी,  हवन किये सुबह-शाम वे। तन कि ज्वाला, मन की अग्नि, करते स्वाहा सम्मान से। है त्रिनेत्र में, है पृथ्वी के गर्भ में,  है उदर की आग ये। मत कर अभिमान;मान कहना, अग्नि देव महान है। है प्रलय के पहले वो, है प्रलय के बाद,  सृष्टि के निर्माण में वो, है सबके निर्वाण के बाद। मृत्युलोक के वियोग में साथी, स्वर्गलोक के साथी वो। मत कर अभिमान; मान कहना, है अग्नि देव महान। जग ने कब महिमा मानी, अग्नि कुण्ड की परीक्षा जानी। देव पाठ में अधूरी भक्ति,  हवन कुण्ड से बङती शक्ति।  पूजा में दीपक जलाते, अग्नि देव संग ही आराधना करते है। इसलिए हम कहते है, अग्नि देव महान है ।। -कविता रानी।