ठगा सा मैं | main dhaga sa
ठगा सा मैं - विडिओ देखे ठगा सा मैं ठगा सा महसूस करता हूँ । खुद ही अपने को हरता हूँ । कोई सगा ढूँढता फिरता हूँ । मैं दगा लेता फिरता हूँ ।। किसे कहूँ अपने मन की । कि है क्या मेरे मन की । मैं रोज फालतु मरता हूँ । मैं सगा बनना चाहता हूँ । और ठगा सा रह जाता हूँ ।। कोई ऐसा नहीं जो, पास रहे, मेरे साथ रहे । कहे मेरी मुझसे और सुने मेरी मुझसे, कि मैं क्या सोचता हूँ । क्यों ठगा सा महसूस करता हूँ । मैं सगा ढूँढता रहता हूँ ।। मैं अपना सगा ढूँढता फिरता हूँ । और हर जगह ठगा सा मैं फिरता हूँ ।। Kavitarani1 88