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दुनिया / Duniya

दुनिया दुनिया अजीब है दुनिया, ख्वाब कितने दिखाती दुनियाँ। अपनों को मिलाती-बिछङाती दुनियाँ। कितना बङा अर्थ लिए है ये दुनियाँ। सारा जहाँ, सारा नभ, तीनों लोक शामिल हो इसमें जैसे, सच भी तो है ये कहना, विस्तृत है इसमें। सारे गम भरे पङे जहाँ वहीं पङी सारी खुशियाँ। सारे दोस्त है जहाँ वहीं सारे दुश्मन भी है यहीं। जितनी खुबसुरती लिए है वहीं इन्सानी गंदगी भी भरी है यहाँ। कहने को पुरी हलचल, स्थिरता, सच्चाई लिए है ये दुनियाँ। ये दुनियाँ गजब की है ये दुनियाँ। पल-पल रंग है बदलती ये, हरपल गम देती ये। खुशियाँ होती है जब सब गम भुला देती है ये। जहाँ दगा करते मित्र, रिश्तेदार, ताने मिलते हैं जहाँ हजार, अपने पराये सब शत्रु बन, जब करते हैं दिलों दिमाग पर वार, जब प्रकृति ही अपने विपरित हो जाए। तब रहता बस नश्वर शरीर अपने साथ। तब होती है नफरत खुद से, तब टुटता मन हर पल। तब समझ आती है असली दुनियाँ।। -कवितारानी।

मैं भक्त भोले का।

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  मैं भक्त भोले का। रत में अपनें आप में। विरक्त हूँ अपने आप में। नर हूँ नशा करता हूँ। नशा करता हूँ ताप में। भला चाहूँ सबका, सबको रखना चाहूँ पास में। मैं भक्त भोले का।। करुँ सब अपने मन का मैं। सुनू सबकी , सबकी सुनता रहूँ । अपनी करुँ, अपनी करता रहूँ। रहूँ धून में अपनी मैं। रहूँ खोया आप में। मैं भक्त भोले का। रहूँ मग्न अपने आप में।। - कविता रानी।

मंजिल अभी बाकि है / manjil abhi baki hai

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लगातार मेहनत करते-करते लगने लग जाता है कि अब मंजिल ज्यादा दुर नहीं है। जब हम थका सा महसुस करने लगते है और मन टुटने लगता है, तो हमें जरुरत होती है एक आखरी प्रयास की। यह कविता हमारे जीवन के इसी प्रकार के मोङ को बताती है। मंजिल अभी बाकि है।  रुक गया हूँ, मैं हारा नहीं। सोंच रहा हूँ, लक्ष्य छोङा नहीं। बस एक पल की दूरी है। वो उङान मेरी अधूरी है। वो सपना मेरा बाकि है। वो मंजिल मेरी बाकि है।। एक ख्वाब सजाया था जो बचपन में। उसे पाना है मेरे जीवन में। उसकी चाहत है वो पूरी करनी है। मूझे मेरी कहानी पूरी करनी है। है जिसमें मेरी रानी साथ। आराम, ख्वाब, और राज़। खास लोगों की है उसमें बात। वो जिन्दगी जीनी है एक बार। मेरी मंजिल की दूरी है। और राह की मज़बूरी है। बस कुछ दिन जरुरी है। बस कुछ दिन जरुरी है। अभी जिन्दगी मेरी बाकि है। अभी मंजिल मेरी बाकि हैॆ।। - कविता रानी। 

मेरा सिखना जारी है / mera sikhna jari hai

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हमें हमेशा सिखने के लिए तत्पर रहना चाहिए, इस सिखने पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं पङना चाहिए। ये कविता अपने सिखने के दौर की संजोयी यादों पर। कुछ यादें हमेशा के लिए हमारे मन मस्तिष्क पर छा जाती है और जो हमें हमारे संघर्ष के दिनों की याद दिलाती है। मेरा सिखना जारी है। मेरा सिखना जारी है,  फिर नई तैय्यारी है। मैं रुका नहीं ना रुकने की कोई बात है।। मैं कल ही आया हूँ, अपनें प्रशिक्षण में खोया हूँ। वहाँ कि हवा में बंधा हूँ, अभी जैसे मैं नया हूँ।। मांऊट आबू की वो ठंडाई याद है, दिन की धूप याद है। सुबह का व्यायाम याद है, दिन की क्लास याद है।। मैं अपनें आप में अभी सिमटा हूँ, दुनिया से अलग महसुस करता हूँ । मुझे भौर का उठना अच्छा लगने लगा है। और रात को जल्दी सोना जमने लगा है।। समय पर काम अब आदत बन गई है। व्यवस्थित चीजों को रखना जम गया है।। मुझे मेरी टोली परिवार सी लगती है।  फोन कर पूछता हूँ भाई तबीयत कैसी है।। वो शुरुवात के पंजीकरण की याद है। वो अंत की सर्वधर्म प्रार्थना याद है।। यादों के नये किस्से लिख आया हूँ। मैं स्काउट कैंप में बहुत सिख आया हूँ।। अभी ये जैसे शूरुवात है, मेरा सिखना अभी ...