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बेवक्त त्योहार | Bewaqt tyohar

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Bewaqt Tyohar - kavita by Kavitarani1, see here बेवक्त त्योहार  वक्त, बेवक्त त्योहार आते रहे । खेलते जग में हम बैठे रहे । मन के बोझ तले सोंचते रहे । क्यों वीरानों में हम रहे । क्यों कहीं किसी को गले लगाया । जो पास आया क्यों ना उसे पाया । क्यों दूर जग से बने रहे । क्यों अपनी जिद पर अड़े रहे । वक्त, बेवक्त, बेअसर हम रहे । जख्म अपने खुद ही खुरेचते रहे । सोंचते रहे कोई आये खुशियाँ ले । सोंचते रहे सब अब बदलेगा । कोई आयेगा मुठ्ठी भर गुलाल ले । रंग देगा मुझे अपने रंग । बस यही ख्वाब सजाये रहे । बैठ अकेले निहारते रहे । वक्त, बेवक्त त्योहार जाते रहे । हम बेरंग बैठे रहे ।। Kavitarani1  157