दरखास्त / Darkhast (love poem)
Darkhast - click here to see video दरखास्त अब दरखास्त है मेरी रब से, कि जिन्दगी में ऐसा भी कोई आये, जो बस मेरे लिये हो, और मैं उसके लिये । जिसका सारा समय मेरे लिये हो, और मेरा समय उसके लिये, मेरी शुभ सुबह उसी से हो, और मेरी शुभ रात्रि भी उसी से । उसका चेहरा मेरे सामने रहे, और मेरा चेहरा उसके दिल में । उसके काज़ल से मैं चिपका रहूँ, और मेरी मुस्कान से वो । अब प्रार्थना है ईश्वर से; कि मेरी बाहों में कोई आये, सुकुन उसके छुने से हो, और राहत उसके पास होने से । जो बस मेरे लिये सजे, और मेरी तारीफें रहे उसके लिये, जो बस मेरे लिये व्यस्त रहे, और मैं उसे देख के मस्त रहूँ । जो मेरे लिए दिन की छांव बने, और रात की गर्मी, जो मेरे लिये जीये, और मैं उसी के लिये । दरखास्त है ईश्वर से कि; कोई सच्चे दिल से चाहने वाली मिले, प्रार्थना है ईश्वर से कि; काश कोई दिल से चाहने वाली मिले ।। Kavitarani1 80