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वक्त भी बदलेगा / waqt bhi badalega

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ना अच्छा समय हमेशा रहता है, ना बुरा समय हमेशा रहता है। तो यही बात मन में रख हमें हमेशा कर्म करने चाहिए। कि जब कोई ऋतु हमेशा बनी नहीं रहती तो ये वक्त कैसे एक सा बना रहेगा- ये वक्त भी बदलेगा ।   वक्त भी बदलेगा  बादल गरज रहे, बिजलियां चमक रही। मौसम भड़क रहा, बारिश बरस रही।  मैं बिन मौसम बैठा हुँ,  क्यों मैं ऐसे ऐठा हुँ। कही खोया हुआ सा मन मेरा, सोच रहा मैं आगे बढ़ने की। वो भाव मेरे औझल है,  सब और जल ही जल है। ये नहीं की मैैं हारा हूँ,  पर अपनों से बेसहारा हूँ।  मैं रोज नयी दौड़ चूनने वाला हूँ , जीवन में जोड़ नयी बुनने वाला हूँ।  इंतजार में हूँ कब बहुगाँ, बहता निर्मल दरिया बनुगाँ। सब कुछ प्रकृति पर है, मौसम भी बदलते है।  ये वक्त भी बदलेगा, मेरा वक्त भी बदलेगा।। - kavitarani1 

friendship /दोस्ती प्यारी

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दोस्ती प्यारी। मई मिल्या कुछ दोस्त प्यारा। विश्वास प खरा वे सारा। साथ वाक लाग् न्यारा। म्हार पास ह कुछ दोस्त प्यारा।। सुख-दुख म साथ आव। म्हारी सुन, मई सुनाव। समझ म्हारी मन की बातां। लम्बी होव म्हाकी बातां।। दूर रह क भी पास लाग्। मन की बस वास् लाग्। झूठ - मूठ हसी न आव्। जो हसा तो साथ हसाव।। थोङा ही ह म्हार पास यारा। थोङा ही रखुं मुं प्यारा। ज्यादा स म्हारी बन कोनी। या क जसा मल्या भी कोनी।। साथ या क मस्ती सारी। उदासी म्हारी मिट सारी। याद रेव या दोस्ती प्यारी। म्हार पास जा यारी।। - कविता रानी।  

चल रही जिन्दगी । chal rahi zindagi

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                        जीवन में तरह-तरह के लोग मिलते हैं, हमें उनमें ज्यादा उलझे बिना कैसे बढ़ते रहना चाहिए, बताती एक सुन्दर कविता । चल रही जिन्दगी। कौन सगा, कौन संगी। मैल मिले बैमेल अतरंगी। जंग सी चल रही, जिन्दगी ये जंग सी। कौन भला, कौन भाला, झेल रहे हम सब अतरंगी।। भली राह-राह पर बलि, ले रही हर मनरंगी। झैल रहे बेमतलब,  लोग अजनबी - अतरंगी।। कौन भला, कौन भाला। कौन बताये रंगबधी। सब मतलब के, मतलब की ये जिन्दगी। चल रही जिन्दगी, चल रही जिन्दगी।। - कविता रानी।

अच्छा लगा ।

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  अच्छा लगा। इस जीवन की भाग दौङ में। लगी रहती इस होङ में। मैं कईयों को पीछे छोङ आया। मैं हर जगह कुछ दिल तोङ आया।। लगा जैसे वो भूल गये होंगे। मेरे संदेशो को पाकर रुठ गये होंगे। क्या याद रहा होगा उन्हें मैं अब। सब व्यस्त होंगे जीवन में अब।। तब ही एक संदेश मैंने पाया। अंधेरे में जैसे दीप जला पाया। फिर वो मुस्कान और सवाल आये। जीवन के मधूर लम्हें भाये।। अच्छा लगा जान कर कि कोई याद करता है। बेमतलब भी इस दुनिया में कोई रहता है। सादगी से उसकी मन खिल उठा। याद कर उस सफर को मैं हसने लगा।। ये अच्छा था की कुछ लोग मन के मिले। इस दुर्गम राह कुछ पल मेरे साथ चले। उन्हे अब याद कर दुआ देता रहता हूँ। अच्छा लगा कहकर मन हरता हूँ।। - कविता रानी।

कैसे इंसान हो / Kaise insan ho

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  Kaise insan ho - click here to see video कैसे इसांन हो। जब होते देख जुल्म तो, मन कह उठा दर्द से। कैसे इंसान हो! दिल है की नहीं कुछ! कुछ शर्म तो बची होगी। या कुछ समझ बाकि रही होगी। मेरा ना सोंच सके कोई बात नहीं। पर अपनी ना सोंच सके , ये क्या बात हुई।  जो बोल बोले भूला नहीं। कङवे घूट पीना आसान नहीं। जो हुआ अतीत में कभी कहीं। वो भूल जाना आसान नहीं। पर भूल सब याद करता हूँ। मै हूँ परिवार समाज में कहता हूँ। जो है जीवन में सहता हूँ। जो है नहीं तुम बिन कहता हूँ। कि कहीं कोई दिल है कि नहीं। अपनी समझ है कि नहीं। कुछ शर्म बाकि है कि नहीं।। कैसे एक सच्चे मन को ठुकराते हो। कैसे एक बईमान बन जाते हो। जो भला चाहे करना, बुरा करते हो। क्यों इंसान सा बरताव नहीं करते हो। कैसे इंसान हो।। - कविता रानी। (KR)

Sab bematalab (बेमतलब ) hindipoetry

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Click here to see video   बेमतलब  रोज़ का उठना , नहाना ,काम पर जाना। समय पर सब कुछ करते रहना। लगता है कुछ तो है मतलब। । जब कुछ हाथ आता हैं कुछ साथ जाता है।  पर जब बैठ अकेले जीवन की बात करता हूँ।  जीवन के बाद की सोचता हूँ।  लगता हैं, सब है बेमतलब। । रोज सबसे मिलना, बातें करना।  काम पड़े तो कहना,  काम ना पड़े तो भी साथ रहना।  सब लगता जैसे है मतबल।  जब छोड़ साथ,अकेले पड़ता है रहना। दूर रहकर याद ना करना ।  लगता है काटा था समय बस। लगता है सब बेमतलब।  सब बेमतलब।। - kavitarani1

Ye Zindagi | ये जिंदगी

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Click here to see video  ये  जिंदगी यूँ ही कट जानी है ये जिदंगी। कुछ सपनों में रह,कुछ अपनों में रह। कोशिश कर पाने की दोनों को ;  कभी सपनों को, कभी अपनों को, यूँ  ही बट जानी हैं जिंदगी ये। । आशायें कभी छुटती नहीं जीने की। अभिलाषायें बनी रहती कुछ और पाने की। वक्त की रफ़्तार समझ नहीं आती। रह जाती ख़्वाहिशें कई जीने की।  सोच हर कल की चल जाती ये ज़िदंगी ।  रोज हर पल कट जाती ये जिंदगी ।। - कविता रानी। 

Jab sab thik ho (जब सब ठीक हो) hindi poetry

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Click here to see video for this poem   जब सब ठीक  हो।  जब मन भरा हो।  सब कुछ हरा हो । घाव भरा हो । और चाव चढ़ा हो । कुछ नया नहीं आता। मन नया नहीं चाहता । बस कट रहीं हैं अच्छी जिंदगी। बस चल रही है बदंगी। कुछ खास नहीं भाता। सब खास ही होता। यही कहता में जाता। और कुछ याद नहीं आता।  जब सब ठीक  हो। जब सब अच्छा हो । जब मन बच्चा हो। जब तन अच्छा हो। कुछ ज्यादा किया नहीं जाता।  कुछ जिया नहीं चाहता।  बस जीया है जाता।  बस चला है जाता। । - कविता रानी।