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मोर नाचता | Mor nachta

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मोर नाचता  अपनी धुन में-मैं रहता अपनी धुन में । राह चुनता चलता मैं अपने गुन में । कोई कहे ना कहे सुधारता रहता हूँ । मैं मोर नाचता देखता हूँ । और खुद को सवाँरता रहता हूँ ।। है मोरनी की तलाश में । थिरक रहा पैर वो । पंखो को फैलाकर । नाच रहा है वो । थकता नहीं घुम-घुमकर । जोश में नाचता झूम-झूमकर । जो दिखे मोरनी की झलक कहीं । रूकता नहीं एक पल को । मनमोहक-मनभावन नाच है । मोर को तलाश है । इसी तलाश को पुरा करने को । मोर नाचता अपनी धुन में ।। देख मोर की चाल । मैं बदला अपनी ताल । कोशिशों को प्राथमिकता देता । सवँरता खुद और तलाश करता । नाच ना आता नाचता हूँ । मैं भी मोर सा रहता हूँ । वहाँ मोर नाचता अपनी धुन में । यहाँ मैं नाचता  ।। Kavitarani1  223