मैं चल रहा हूँ | Main chal rha hun
चल रहा हूँ बहुत बोझ लेकर चलता हूँ, मैं बहुत संभल कर चलता हूँ । हो जाती है गलतियाँ मुझसे, मैं गलतियों से सिखता हूँ । हाँ पसंद नहीं आते लोग मुझे, चिड़ता हूँ और गुस्सा करता हूँ, पर क्या करूँ कुछ मजबुर हूँ, मैं आखिर इनके बीच जीता हूँ । होती है हो जाये खफा दुनिया, संभल रही नहीं मुझसे दुनिया, कोशिश सबको मनाने की करता हूँ, मैं अपनी धुन में चलता हूँ । काम आते है कुछ लोग मेरे, कुछ लोग चिढ़ाते है मुझे, समझ रहा हूँ और बढ़ रहा हूँ, आज भी शांति की तलाश में हूँ । सुकून की तलाश में आशियाना बना रहा, कैसे-कैसे कर किये जा रहा, सोचता हूँ कुछ बदलेगा जीवन में मेरे, बदलने की चाह में बदला जा रहा । बहुत बातें आती है मन में, हर बात की सोंच आज चल रहा हूँ । मैं वैसे तो रूका हूँ यहीं, पर आगे बढने की कोशिश कर रहा हूँ ।। Kavitarani1 307