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शाम जरूर होगी | Sham jarur hogi

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Click here to see video यह एक कविता उन लोगो के लिए जो अपनी मंजिल के काफी पास आने के साथ ही हिम्मत हारने लग जाते हैं। यह कविता हमें प्रेरित करती है कि हमें कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। शाम जरूर होगी  है धुप तो क्या ?  शाम ना होगी । तेज बारिश है तो क्या ?  बारिश खत्म ना होगी । मिट गई सर्दी और गर्मी भी, क्या रात नहीं होगी । है भ्रम में जग सारा, है भ्रम में जग सारा, धुप है बहुत,  मै सब्र नहीं करता, पर जानता हूँ, शाम जरूर होगी । फिर दिन निकलेगा, फिर नयी उमंग होगी । है उमस बहुत अभी, ये गर्मी एक दिन खत्म जरूर । है धार तेज नदिया की, होगी खत्म बारिश तो, ये दरिया भी पार होगी । तु सब्र कर ऐ पथिक, तु हिम्मत रख है राही, है तेज धुप तो क्या,  शाम नहीं होगी । शाम जरूर होगी ।। Kavitarani1  268

सपनें मेरे / sapne mere

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Click here to see video असमंझस सी है जिन्दगी, कभी हार तो कभी जीत है जिन्दगी। हार से हमें रुकना नहीं, और जीत से ज्यादा प्रभावित होना नहीं। जीवन में और करना क्या, एक सपना देखना है और उसे पूरा करना है। सपनें मेरे  सपनें मेरे,  कभी लगता है मिल जायेंगे,  कभी लगता है नहीं मिलेंगे, कभी पाने को उन्हें भागता हूँ,  कभी ना चाहे तो भी ताड़ता हूँ,  सपने मेरे... औझल करने वाले मुझे ही, एक छोर टिकते ही नहीं,  कभी सबके मन पर छाने के,  कभी अधिकारी बन जाने के, कभी समाज सेवी बनने के,  कभी आराम की जिन्दगी जीने के,  एक हो तो जानूं इन्हें,  रूके कुछ पल तो जानूं इन्हें,  अनकहे - अनसुने सारे, आ जाते बन बहानें, सपने मेरे । संतोष मिले पाकर इन्हें,  आशा की किरण आये, बन मृगतृष्णा से, मेरी आँखों पर छाये, हाय किस्मत मेरी, ले जाती कहाँ मुझे,  और सपने मेरे,  दौड़ाते फिरते मुझे । सपने मेरे  ।। Kavitarani1  192