कहना है तुमसे ही / Kahna hai tumse hi
कहना है तुमसे ही मजबुर नहीं आज मैं, ना दोष कोई रखता हूँ । कोई जरा सा प्यार से कहे, बस वहीं मैं बसता हूँ । है जमाने में लोग कई, सुनाने को दोस्त कई । पर इस दिल को कहना है तुमसे ही, साथ रहना और सुनना है तुमसे ही । मुझपे वश नहीं किसी का, और मन मेरे वश में नहीं । सुखा रेगिस्तान सा जहाँ मेरा, फूलों को रखना हेसियत में नहीं । जानता हूँ किस्मत नहीं सहज की, मैं भी कोई अब आम नहीं । पर दिल जिसको चाहे, उसके लिये मैं कुछ भी नहीं । समझे ना कोई - कोई फर्क नहीं, समझे बस तु कहना यही । कहना है तुमसे जो कहना , सुनना है तुमसे जो सुनना है । हो हाल कोई, हो बात कोई, खुसी तुमसे ही, गम तुमसे ही, कहना है तुमसे ही ।। Kavitarani1 275