भुल जाऊँगा / bhul jaunga



 भुल जाऊँगा


भुल गया हूँ मैं बचपन अपना।

वो दिन दुर्दिन, वो सबसे बुरी दशा।

भुल गया सुख भी और भुल गया सुखद सपना।

एक दिन भुल जाऊँगा आज का दिन भी।

ये परेशानियाँ और सबक भी।

ये बेवजह अजनबियों से चोट सी लगती भनक भी।

ये नये लोग, ये नये घाव, ये नयी चुनौतियाँ।

सब भूल जाऊँगा।।


जब भुल गया अपनी जन्म की दासतां।

और दिन रात डराने वाले शैतान का पेहरा।

वो काली डरावनी रातें और दिल चीर देने वाली बातें।

तो निश्चित ही ये अफसर की फटकार।

ये बाबुओं की भटकाने की मार।

ये प्रेम में हार सब भुल जाऊँगा।

हाँ एक दिन ये सब भूल जाऊँगा।

और कौन दर्द के लम्हे याद रखते हैं।

कौन कहता है कि आप सुनाओ अपने गम।

सब अपने राग अलापते हैं।

सब अपनी ही तो गाते हैं।

लोग अपनी ही सुनाते हैं।।


-कवितारानी।


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