काश मैं रवि होता / kash main Ravi hota


 अथक मेहनत की अभिलाषा के साथ जब कल्पनायें अपने सर्वश्रेष्ट आदर्श के बारे में विचार करती है तो मन के संवेग कुछ इस प्रकार से सामने आते हैं। यहाँ सुर्य देव को अपना आदर्श बताया गया है जो हर दिन बिना रुके चलता रहता है। पथिक भी इसी प्रकार से अपने आप को अपने लक्ष्य पर लगाना चाहता है। पढ़िये हमारी एक सुन्दर प्रेरणास्पद कविता- काश मैं रवि होता।


काश मैं रवि होता 


काश मैं रवि होता,  

बेपरवा,लगातार चलता रहता, 

पास आता कोई भस्म कर देता, 

अपनी ही धुन में चलता रहता, 

काश मैं रवि होता। ।


रोशन जग करता, 

सबका जीवन बनता,

अंधेरा दूर करता,

सिहरन दूर करता,

सर्दी की दवा बनता, 

लोगो की दवा बनता,

आस बनता खास बनता, 

काश मैं रवि होता।


लोग रात भर मेरा इंतजार करते।

वृक्ष भी रात भर मेरा इंतजार करते।

दूर से ही मेरा दीदार करते।

ईश्वर को मेरा धन्यवाद करते।

मुझसे आस करते ।

मेरा ही विश्वास करते।

काश मैं रवि होता।।


बुराई मुझसे दूर होती।

शैतानियाँ मुझसे कांपती होती।

बुरी नजर मुझसे जल जाती।

बुरे लोग मुझसे छुप जाते।।

मेरे ताप से रोग सारे भाग जाते।

नये फुल खिल जाते।

पक्षी - पशु सारे खिलखिलाते।

धारायें साफ नजर आती।।

पहाङियाँ चमक जाती।

नये रास्ते फिर सुलभ होते।

आशाओं के दीप होते।

लोग खुशी से झूमते गाते।।

रवि को पाकर आह्लादित होता।

मुझे पाकर खुश होते।

काश ये सब सच होता।

काश मैं रवि होता।

काश मैं रवि होता।।


-कविता रानी।

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