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सबर / sabar

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सबर  कट जाते है पहर युँ ही, रह जाते है करते बसर सबुरी, राहत की राह मिलती नहीं, सपनों की कली खिलती नहीं, हट नहीं रहा कोहरा घना, दिख नहीं रहा सवेरा यहाँ, ठोर बदलुँ सोंचता हुँ, बदल नहीं रहा भाग यहाँ, जाऊँ कहाँ सोंच वही, सपनों में बसी है दुनिया यही, समझाती बुझाती मुझको ही, मै हुँ यहीं मेरा छोर कहीं, वक्त की रफ्तार से, मांगता हुँ प्यार से, मिलता पर बस वही, जो कहा दिल था नही, कट जाते है पहर युँ ही, रह जाते है करते सबुरी।। -कवितारानी।