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गुजरे लम्हें / gujare lamhe

  गुजरे लम्हें हजारों लम्हों को एक पल में भुला दिया। सालों की यादों को एक पल में मिटा दिया। बित गये जाने कितने दिन पता नहीं चला। याद रहे लम्हें वो जो मदहोश करने वाले थे। याद रहे वो पल जो तीर की तरह घाव करने वाले थे। नये फसाने बन गये पल भर में कई। तो कई नयी यादें बन पङी। बरसों के किस्से जरा से लम्हें में पुराने हो गये। विश्वास का हुआ कत्ल कही, तो कहीं नया रिश्ता बना। यादों के नये तराने बने कहीं तो कहीं भावनायें नई जुङी। फिर भी याद आता है वो लम्हा जो हसीन था। याद है वो पल जो कुछ खास था। सोंचते थे बचपन से जिस रिश्तें के बारे में। दुर उससे जाने को जी चाहता है। भविष्य की डगर ये सब कुछ मुश्किल नजर आता है। आती है अजब भावनाये जो बहकाती है महसुस कराती है। आती है अजब भावनायें जो बहकाती है महसुस कराती है। की अकेले है हम कुछ नहीं साथ। की डराती है ये के कुछ नहीं तेरे पास। की कहती है की क्या भविष्य होगा क्या भुत था। यह उलझाती है कि तेरा कोई अस्तित्व नहीं। तु बदनसीब है यही सच है।। -कवितारानी।

बीते पल / beete pal

बीते पल जो बीते है खुशी के पल हॅसी के पल, यादों के पल अनजाने पल मस्ती के पल। याद आ रहे हैं वो पल इस पल, छोङ गये यादें अनेक किस्से अनेक, छोह गये तन्हाई फिर याद आई रुसवाई, याद आया बीते पलों का हॅसना, क्यों बीते ये मौज-मस्ती के पल, कहीं मन लगता ना अब इतने हॅसी थे वो पल। चैन गया  नींद गयी बस याद रही, घुम रहे चेहरे अनेक बातें अनेक, क्यों टिस सी जग रही क्यों याद ही बस रही, क्यों नहीं रुकते आँसु जब ना होते ये पल, कभी-कभी मिली खुशी गजब आस बनी, भुलना चाहा पर हर पल मेरे पास रही, ये बीते पल तोङ रहे मेरा मन मेरा तन। तोङ रहे मंजिल मेरी डगर. छोङ रहे अकेला फिर यादों में हर दम, हर दम बस यादें हैं क्यों नहीं कोई हम दम। ये जो है बीते पल याद रहेंगे जीवन भर, याद रहेगा जीवन डगर ये खास पल, ये बीते पल आये तो जी लुं इन्हें जीवन भर, भीगे-भीगे फुर्सत में यादों के पल।। -कवितारानी।

लम्हों / Lamho

चित्र
लम्हों  ऐ लम्हों ठहरो जरा, साथ हूँ मैं, भुलों ना। कौन मेरा तुम्हारे सिवा, कहना है तुमसे रहना है संग सदा। ऐ लम्हों ठहरो जरा, पता है रफ्तार तेज बहुत है तुम्हारी। मैं तो रुक जाता हूँ चलते हुए, अब वो जोश, हवा नहीं मुझमें। जो बढ़ाता था आगे मुझे, तो कुछ ही पर सुन लो मुझे। ऐ लम्हो ठहरो जरा, कुछ बुन लु मैं साथ तुम्हारे। कि सुनाने को किस्से हो, अकेले में गा सकुं। कुछ ही पर यादों के हिस्से हो, ऐ लम्हों साथ दो जरा, कि बुन लुँ मैं यादें यहाँ, ऐ लम्हों साथ ठहरो तो जरा। साथ हूँ मैं सुन लो जरा, पुकारता हूँ ध्यान दो ना। मेरे संग कुछ दुर तक चलो जरा, कह दो की पास हो यहाँ, ऐ लम्हो ठहरो जरा। वो आती जाती यादें, वो किस्से ओर बातें। संग चलते हुए ही तो बुनी थी, कही थी जो भी, किया था जो भी, वो बातें साथ ही है यहाँ। हाँ वो यादे है, वो बातें है, कहती है जो, साथ रहने की सौगाते है। ऐ लम्हों कह दो जरा, साथ चलनें की कह दो जरा। साथ लेकर ही चलो यहाँ, ऐ लम्हों ठहरो जरा, कहता हुँ साथ तो चलो जरा। ऐ लम्हों चल संग जरा, ऐ लम्हों ठहरो जरा।। -कवितारानी।