खोया सा रहता हूँ।


 

खोया सा रहता हूँ।


क्या हिसाब लगाऊँ,

क्या है पास मेरे।

जिंदगी जी रहा और अहसास मेरे।।


किसे कहूँ ्अब स्थिर सा रहने लगा हूँ।

जो उङने की सोंचा था,

बैठा रहने लगा हूँ।।


कहीं गुम सा हूँ मैं।

कहीं खोया हूँ मैं।।


ये चित्त कहीं लगता नहीं आजकल।

कुछ खास लगता नहीं आजकल।।


अब कल के दुख याद भी नहीं आते हैं।

और लोग बेवजह मेरे लिए मुस्कुराते हैं।।


मैं कहाँ खुश रहता हूँ।

आजकल मैं खोया सा रहता हूँ।।


- कविता रानी।


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